हर महीने सिर्फ 10,000 निवेश करें, रिटायरमेंट में मिल सकती है 2 लाख तक की मंथली इनकम!
क्या हर महीने ₹10,000 की SIP से करोड़ों का फंड बनाया जा सकता है? जानिए SIP और SWP का पूरा गणित, कंपाउंडिंग का असर, अनुमानित रिटर्न और कैसे तैयार फंड से हर महीने नियमित इनकम ली जा सकती है। निवेश से पहले जरूरी बातें भी समझिए।
SIP Investment: अगर आप भी चाहते हैं कि छोटी-छोटी बचत भविष्य में बड़ा फंड बन जाए और रिटायरमेंट के बाद हर महीने बिना नौकरी किए नियमित आमदनी मिलती रहे, तो म्यूचुअल फंड का SIP और SWP मॉडल आपके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। वित्तीय विशेषज्ञ भी लंबे समय के निवेश के लिए SIP को सबसे अनुशासित तरीका मानते हैं। वहीं, जब बड़ा फंड तैयार हो जाता है तो SWP उसी पूंजी को नियमित मासिक आय में बदलने का विकल्प देता है।
आखिर SIP और SWP में अंतर क्या है?
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले अधिकांश लोग SIP का नाम तो जानते हैं, लेकिन SWP के बारे में कम जानकारी रखते हैं। जबकि दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और निवेश के अलग-अलग चरणों में काम आते हैं।
SIP यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के तहत निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि म्यूचुअल फंड में निवेश करता है। इसका उद्देश्य समय के साथ बड़ा निवेश तैयार करना होता है। वहीं SWP यानी सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान उस समय काम आता है, जब निवेशक के पास पहले से अच्छा-खासा फंड तैयार हो चुका हो और वह उसी फंड से हर महीने एक निश्चित रकम निकालना चाहता हो। सरल शब्दों में समझें तो SIP में पैसा निवेश किया जाता है, जबकि SWP में उसी तैयार फंड से नियमित निकासी की जाती है।
10,000 की SIP से कैसे बन सकता है 2 करोड़ का फंड?
अगर कोई व्यक्ति हर महीने केवल 10,000 की SIP शुरू करता है और उसे लंबे समय तक बिना रुके जारी रखता है, तो कंपाउंडिंग की ताकत उसके निवेश को कई गुना बढ़ा सकती है।
मान लीजिए निवेशक लगातार 30 वर्षों तक हर महीने 10,000 निवेश करता है और उसे औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है। ऐसी स्थिति में उसका कुल निवेश लगभग 36 लाख होगा, लेकिन कंपाउंडिंग की वजह से यही रकम बढ़कर करीब 2 करोड़ या उससे अधिक तक पहुंच सकती है।
यदि निवेश अवधि 25 वर्ष रहती है, तो अनुमानित फंड करीब 1.5 करोड़ तक पहुंच सकता है। हालांकि वास्तविक रिटर्न बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
कंपाउंडिंग कैसे बदल देती है निवेश का गणित?
म्यूचुअल फंड में लंबी अवधि तक निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग देती है। इसका मतलब यह है कि आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे चलकर रिटर्न कमाने लगता है।
शुरुआती वर्षों में फंड की ग्रोथ सामान्य दिखाई देती है, लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता है, निवेश की रफ्तार तेज होती जाती है। यही वजह है कि वित्तीय सलाहकार जल्द निवेश शुरू करने और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की सलाह देते हैं।
बड़ा फंड बनने के बाद SWP कैसे देगा नियमित आय?
मान लीजिए आपके पास SIP के जरिए करीब ₹2 करोड़ का कॉर्पस तैयार हो चुका है। अब आप उस रकम को एक साथ निकालने के बजाय SWP के जरिए हर महीने निश्चित राशि प्राप्त कर सकते हैं।
अगर आपके निवेश पर आगे भी लगभग 8 से 10 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता रहता है, तो उस फंड से हर महीने लगभग ₹1.5 लाख तक की नियमित निकासी संभव हो सकती है। इस दौरान फंड का बचा हुआ हिस्सा बाजार में निवेशित रहता है और उस पर रिटर्न मिलता रहता है।
हालांकि यदि निकासी रिटर्न से अधिक होगी, तो धीरे-धीरे मूल निवेश भी कम होने लगेगा। इसलिए SWP शुरू करने से पहले उचित वित्तीय योजना बनाना जरूरी है।
किन लोगों के लिए SIP और SWP सबसे बेहतर विकल्प हैं?
जो लोग नौकरी या व्यवसाय कर रहे हैं और भविष्य के लिए बड़ी पूंजी तैयार करना चाहते हैं, उनके लिए SIP बेहतर विकल्प माना जाता है। वहीं जिन लोगों ने पहले से अच्छा निवेश तैयार कर लिया है और रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहते हैं, उनके लिए SWP काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
यही वजह है कि आज कई निवेशक SIP के जरिए संपत्ति बनाते हैं और बाद में उसी फंड को SWP के माध्यम से मासिक आय में बदल देते हैं।
निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े निवेश हैं, इसलिए इनमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। 12 प्रतिशत या 10 प्रतिशत रिटर्न केवल अनुमानित उदाहरण हैं। वास्तविक रिटर्न बाजार के प्रदर्शन और चुने गए फंड पर निर्भर करेगा।
निवेश शुरू करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता, वित्तीय लक्ष्य और निवेश अवधि का सही आकलन जरूर करें। जरूरत पड़ने पर किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना बेहतर रहेगा।
