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अगले हफ्ते शेयर बाजार में क्या होगा? US-Iran समझौता, Fed के फैसले और महंगाई के आंकड़ों पर टिकी निवेशकों की नजर

भारतीय शेयर बाजार की दिशा अगले सप्ताह अमेरिका-ईरान समझौते, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले, महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से तय होगी। निवेशकों की नजर Sensex-Nifty की अगली चाल पर बनी हुई है।

 
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Share Market Next Week: भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। बाजार की दिशा तय करने में घरेलू और वैश्विक दोनों कारक अहम भूमिका निभाएंगे। निवेशकों की नजर मई महीने के महंगाई आंकड़ों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान के संभावित शांति समझौते पर बनी हुई है।

विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाक्रमों का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर देखने को मिल सकता है। साथ ही विदेशी निवेशकों (FPI) की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों के रुझान भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करेंगे।

US-Iran समझौते पर टिकी बाजार की नजर

बाजार के लिए सबसे बड़ा वैश्विक घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं। यदि यह समझौता सफल रहता है तो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से वैश्विक शिपिंग के लिए खोला जा सकता है।

हालांकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि यदि समझौता अपेक्षित परिणाम नहीं देता है तो तनाव दोबारा बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशक इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

Fed की बैठक से मिलेगा बाजार को बड़ा संकेत

इस सप्ताह 16 और 17 जून को होने वाली अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक भी निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाली है। बाजार की नजर केवल ब्याज दरों पर ही नहीं, बल्कि फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीति, महंगाई के आकलन और आर्थिक विकास के अनुमान पर भी रहेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि फेड की टिप्पणियां वैश्विक पूंजी प्रवाह और उभरते बाजारों में निवेश की दिशा तय कर सकती हैं।

महंगाई के आंकड़े बढ़ाएंगे बाजार की धड़कन

घरेलू मोर्चे पर मई महीने के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई के आंकड़े निवेशकों के लिए अहम संकेत देंगे। महंगाई की स्थिति और मानसून की प्रगति दोनों ही भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि महंगाई नियंत्रण में रहती है तो यह बाजार के लिए सकारात्मक संकेत साबित हो सकता है।

FPI की लगातार बिकवाली चिंता का विषय

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 62,853 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर चुके हैं।

वहीं, वर्ष 2026 में अब तक एफपीआई कुल 2.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रकम भारतीय बाजार से निकाल चुके हैं, जो पिछले वर्ष की कुल निकासी से भी अधिक है। लगातार बिकवाली बाजार की गति को प्रभावित कर सकती है।

कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगा फोकस

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान समझौते की संभावनाओं के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और अर्थव्यवस्था को भी राहत मिल सकती है। यही वजह है कि निवेशक तेल बाजार की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखेंगे।

पिछले सप्ताह बाजार में रही मजबूती

पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया था। बीएसई सेंसेक्स 1,284.61 अंक यानी 1.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी में 256.20 अंक यानी लगभग 1 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई।

अब निवेशकों की निगाह इस बात पर है कि आने वाले सप्ताह में वैश्विक और घरेलू घटनाक्रम बाजार की इस तेजी को आगे बढ़ाते हैं या फिर मुनाफावसूली का दौर देखने को मिलता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।