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फ्रांस में 11 वर्षीय लड़की की हत्या: न्याय व्यवस्था पर सवाल, मंत्री के इस्तीफे की मांग
 

 
 फ्रांस में 11 वर्षीय लड़की की हत्या: न्याय व्यवस्था पर सवाल, मंत्री के इस्तीफे की मांग
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पेरिस: दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के जेर (Gers) विभाग में 11 वर्षीय यहान्ना (लिहाना) नामक लड़की का शव मृत अवस्था में मिला है। इस मामले में आरोपी 41 वर्षीय जेरोम बरेला पर पहले भी बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के कई आरोप थे, लेकिन न्याय व्यवस्था की कथित लापरवाही ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया है।

पुलिस के अनुसार, यहान्ना का शव पिछले गुरुवार को फ्लोरांस शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर एक फार्म पर मिला। वह स्कूल से लौटते समय लापता हो गई थी। बरेला, जो लड़की की सहेली का पिता है, को लापता होने के तीन दिन बाद गिरफ्तार किया गया। उसने यहान्ना को अपनी कार में स्थानीय स्विमिंग पूल ले जाने की बात स्वीकार की है, लेकिन हत्या में किसी भी संलिप्तता से इनकार किया है। पूछताछ के दौरान उसने जवाब देने से मना कर दिया।

पहले भी कई शिकायतें, फिर भी कार्रवाई नहीं

सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात पर है कि आरोपी बरेला के खिलाफ पहले भी बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा की पांच अलग-अलग जांचें चल चुकी थीं, जिन्हें या तो खारिज कर दिया गया या बिना कोई कार्रवाई के बंद कर दिया गया। 

अगस्त 2024 में 10 वर्षीय रोजा की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि बरेला ने उसकी बेटी का यौन शोषण किया। चिकित्सा परीक्षण में दुर्व्यवहार की पुष्टि भी हुई, लेकिन इसके बावजूद नौ महीनों में जांचकर्ताओं ने बरेला से एक बार भी पूछताछ नहीं की। 

जनता का मानना है कि अगर पुलिस ने समय पर आरोपी से संपर्क किया होता तो यहान्ना की हत्या रोकी जा सकती थी।

देशव्यापी प्रदर्शन

सोमवार को फ्रांस भर में 60,000 से अधिक लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने न्याय मंत्री जेराल्ड डारमैनिन के इस्तीफे की मांग की। 

यह घटना फ्रांस में बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा और न्याय व्यवस्था की विफलताओं पर फिर से बहस छेड़ गई है। सामाजिक मनोविज्ञान शोधकर्ताओं ने ऐसी घटनाओं की दृश्यता की तुलना भूमिगत नदी से की है, जो कभी सतह पर आती है और फिर गायब हो जाती है। 

पिछले मामले और आयोग

2021 में ला फैमिलिया ग्रांदे पुस्तक के बाद राष्ट्रपति ने पीड़ितों को आश्वासन दिया था और स्वतंत्र आयोग (CIVISE) गठित किया गया था, जिसने 82 सिफारिशें दीं। लेकिन वे सिफारिशें अब भी अमल में नहीं आई हैं।

यहान्ना की हत्या ने एक बार फिर पूरे सिस्टम की आलोचना तेज कर दी है। सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।