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होर्मुज में डबल नाकाबंदी से हड़कंप, तेल सप्लाई पर मंडराया वैश्विक संकट, जानें भारत पर होगा कितना असर?

 
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नई दिल्ली। दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट Strait of Hormuz इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। पहले ईरान ने इस मार्ग पर पाबंदी लगाई और अब डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने भी जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने का फैसला कर दिया है। इस दोहरी नाकाबंदी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है।

क्या है पूरा मामला?

मामले की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने अमेरिका-इज़राइल के हमलों के बाद जवाबी कदम उठाते हुए होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने भी सख्त रुख अपनाते हुए इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया।

हालांकि अमेरिकी सेना का कहना है कि यह प्रतिबंध मुख्य रूप से ईरान से जुड़े जहाजों पर लागू होगा, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका असर पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ेगा।

दुनिया में क्यों मचा हड़कंप?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है। दोहरी नाकाबंदी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में तेजी आई है, वहीं शेयर बाजारों में गिरावट देखी जा रही है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

भारत के लिए क्यों बड़ी चिंता?

भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में बाधा आने से भारत की सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

ईरान से रिश्तों से मिली थोड़ी राहत

हालांकि संकट के बीच भारत के लिए एक राहत की खबर भी है। ईरान के साथ पुराने कूटनीतिक संबंधों के चलते कुछ भारतीय जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति मिली है।

भारत ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए किसी तरह का शुल्क नहीं दिया गया, बल्कि यह सहयोग दोनों देशों के रिश्तों का परिणाम है।