EU-भारत FTA से ट्रंप को बड़ा झटका, ग्रीनलैंड विवाद ने बिगाड़ा अमेरिका का खेल
Washington/New Delhi : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वैश्विक व्यापार में डबल झटका लगने वाला है। एक तरफ यूरोपीय यूनियन (EU) भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की घोषणा करने जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और EU के बीच की ट्रेड डील सस्पेंड हो सकती है। BBC की रिपोर्ट में इंटरनेशनल ट्रेड कमेटी से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बुधवार (21 जनवरी 2026) को फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में यूरोपीयन पार्लियामेंट अमेरिका के साथ ट्रेड डील को सस्पेंड करने का ऐलान कर सकती है।
यह विवाद ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण के दावे से जुड़ा है। ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड में चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियां अमेरिका के लिए खतरा हैं, इसलिए वे इस पर कब्जा चाहते हैं। लेकिन EU देशों ने इसका कड़ा विरोध किया है। ट्रंप ने दबाव बनाने के लिए अगले महीने से 10 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया, ताकि ये देश ग्रीनलैंड मुद्दे पर उनका समर्थन करें।
ट्रंप की टैरिफ धमकियां और EU का गुस्सा
ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों—डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और फिनलैंड—के सामानों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ये वही देश हैं, जिन्होंने ग्रीनलैंड पर ट्रंप के अमेरिकी नियंत्रण के फैसले का विरोध किया। 18 जनवरी को ट्रंप ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में कहा कि यह टैरिफ बढ़ भी सकता है। फ्रेंच विदेश मंत्री ने इसे "ब्लैकमेलिंग" करार दिया।
यूरोपीय देशों का कहना है कि ट्रंप की धमकियां वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन हैं। पिछले साल जुलाई में स्कॉटलैंड में अमेरिका ने EU देशों के सामानों पर टैरिफ 30% से घटाकर 15% कर दिया था। बदले में इन देशों ने अमेरिका में निवेश और निर्यात बढ़ाने का वादा किया था। लेकिन अब ग्रीनलैंड विवाद ने इस डील को खतरे में डाल दिया है। EU पार्लियामेंट में सस्पेंडेशन का प्रस्ताव पारित होने की संभावना मजबूत है।
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की जिद क्यों?
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और तीन सौ सालों से डेनमार्क का हिस्सा है। 1979 में डेनमार्क ने इसे स्वायत्तता दी, जिसके तहत विदेश, रक्षा और आर्थिक मामलों को छोड़कर बाकी फैसले ग्रीनलैंड लेता है। डेनमार्क NATO का सदस्य है, इसलिए ग्रीनलैंड को इस संधि के तहत सुरक्षा मिली हुई है। NATO सदस्य देशों ने ग्रीनलैंड में सैनिक भी तैनात किए हैं। ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, और चीन-रूस की गतिविधियां अमेरिका के लिए खतरा हैं। लेकिन EU देश इसे डेनमार्क की संप्रभुता का उल्लंघन मानते हैं।
भारत-EU FTA: 27 जनवरी को ऐलान की उम्मीद
ट्रंप की टैरिफ धमकियों से EU नाराज है, और इसी बीच EU भारत के साथ FTA का ऐलान करने जा रहा है। 27 जनवरी को होने वाले इस समझौते से दोनों पक्षों के बाजारों में पहुंच आसान होगी। भारतीय सामानों को EU के 27 देशों में कम या शून्य टैरिफ पर पहुंच मिलेगी, जबकि EU के सामानों को भारतीय बाजार में। अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए 50% टैरिफ लगाया है, जिससे भारत EU की ओर रुख कर रहा है। यह FTA कृषि, टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो और डिजिटल ट्रेड में सहयोग बढ़ाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति को झटका देगा।
भारत की स्थिति और ट्रंप की चुनौतियां
भारत के लिए EU FTA एक बड़ा अवसर है, लेकिन अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। ट्रंप की टैरिफ नीति से भारत को नुकसान हो रहा है। भारत ने अमेरिका को रूस से तेल खरीदने का बचाव किया है, लेकिन ट्रंप इसे नहीं मान रहे। EU का अमेरिका डील सस्पेंड करना ट्रंप के लिए डबल झटका है, क्योंकि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
विश्लेषकों का कहना है कि ग्रीनलैंड विवाद ट्रंप की विदेश नीति की कमजोरी उजागर कर रहा है। EU-भारत FTA से वैश्विक व्यापार गतिशीलता बदल सकती है। ट्रंप प्रशासन को अब यूरोपीय देशों से बातचीत करनी होगी।
