तेल सप्लाई पर संकट के बादल, हॉर्मुज में टकराव से वैश्विक बाजार में हलचल
New Delhi : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे चली मैराथन वार्ता बेनतीजा रहने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अप्रैल से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस बीच चीन ने भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट किया है।
चीन का बयान: ‘शांति के लिए प्रतिबद्ध’
चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा कि उनका देश वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है और मध्य पूर्व की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि चीन के जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सामान्य रूप से गुजर रहे हैं और ईरान के साथ उसके ऊर्जा व व्यापारिक समझौतों का सम्मान किया जाएगा।
वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने ईरान को हथियार सप्लाई करने के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि चीन सैन्य निर्यात के मामले में जिम्मेदार और नियंत्रित नीति अपनाता है।
ट्रंप का बड़ा ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बयान जारी करते हुए कहा कि होर्मुज और न्यूक्लियर मुद्दों पर सहमति न बनने के कारण अमेरिका अब सख्त कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया गया है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोका जाए।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ‘अवैध टोल’ वसूलने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को नष्ट किया जाएगा।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिका के इस कदम पर ईरान ने सख्त प्रतिक्रिया दी है और इसे क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला बताया है। हालांकि, ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अगला कदम स्पष्ट नहीं किया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर डाल सकता है।
