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गाजा पीस डील पर PM मोदी ने की ट्रंप की तारीफ- क्या कम होगी दोनों देशों के बीच की खटास?

 
गाजा पीस डील पर PM मोदी ने की ट्रंप की तारीफ- क्या कम होगी दोनों देशों के बीच की खटास?
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PM Modi Praises Trump: मिडिल ईस्ट की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा मोड़ आया, जब हमास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘गाज़ा शांति प्लान’ के तहत सभी इज़रायली बंधकों चाहे जिंदा हों या मृत को रिहा करने की घोषणा कर दी। यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब गाज़ा में युद्धविराम और स्थायी शांति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पहल का स्वागत किया और इसे “मिडिल ईस्ट में स्थिरता और सुलह की दिशा में बड़ा कदम” बताया।

PM मोदी ने एक्स (X) पर लिखा—
"हम राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व का स्वागत करते हैं। गाज़ा में शांति की कोशिशें निर्णायक प्रगति कर रही हैं। बंधकों की रिहाई की संभावना एक बड़ा कदम है। भारत हमेशा टिकाऊ और न्यायपूर्ण शांति के हर प्रयास का समर्थन करेगा।"

गाजा पीस डील पर PM मोदी ने की ट्रंप की तारीफ- क्या कम होगी दोनों देशों के बीच की खटास?

ट्रंप की ‘डेडलाइन डिप्लोमेसी’

गौरतलब है कि ट्रंप ने हमास को सीधी चेतावनी दी थी- अगर 5 अक्टूबर शाम 6 बजे तक वह इज़रायल के साथ शांति समझौते पर नहीं पहुंचा, तो परिणाम बेहद खराब होंगे। इसी दबाव के बीच हमास ने बयान जारी कर कहा कि वह मध्यस्थों के जरिए तत्काल बातचीत के लिए तैयार है और गाज़ा का प्रशासन एक स्वतंत्र ‘टेक्नोक्रेटिक फिलिस्तीनी निकाय’ को सौंपने के लिए राजी है।

हमास ने अपने बयान में अरब देशों, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और यहां तक कि ट्रंप की कोशिशों की भी सराहना की। यह अहम है क्योंकि गाज़ा की सत्ता अब तक पूरी तरह हमास के हाथों में थी।

ट्रंप का ‘शांति बोर्ड’ और नेतन्याहू की सहमति

हमास की घोषणा के बाद ट्रंप ने इज़रायल से गाज़ा पर बमबारी रोकने की अपील की। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा—
"हमास स्थायी शांति के लिए तैयार है। इज़रायल को बमबारी तुरंत रोकनी चाहिए ताकि बंधकों को सुरक्षित निकाला जा सके।"

गाजा पीस डील पर PM मोदी ने की ट्रंप की तारीफ- क्या कम होगी दोनों देशों के बीच की खटास?

ट्रंप ने इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात के दौरान एक 20 सूत्रीय शांति योजना पेश की, जिस पर नेतन्याहू ने सहमति जताई। इसके तहत उन्होंने घोषणा की कि गाज़ा के भविष्य के लिए एक नया “शांति बोर्ड” बनाया जाएगा। इसमें खुद ट्रंप अध्यक्ष होंगे, साथ ही एक्सपर्ट्स, फिलिस्तीनी प्रतिनिधि और ब्रिटेन के पूर्व पीएम टोनी ब्लेयर भी शामिल होंगे। शर्त साफ है- हमास और दूसरे उग्रवादी गुटों की शासन व्यवस्था में कोई भूमिका नहीं होगी।

अंतरराष्ट्रीय रिएक्शन

कनाडा ने कहा, अब “वादों को हकीकत में बदलने का समय है। संयुक्त राष्ट्र ने स्थायी युद्धविराम और मानवीय राहत की अपील दोहराई। फ्रांस और क़तर जैसे देशों ने इसे “सकारात्मक संकेत” बताया, लेकिन भरोसे और जवाबदेही पर ज़ोर दिया।

भारत-अमेरिका रिश्तों का विरोधाभास

एक तरफ मोदी और ट्रंप गाज़ा शांति को लेकर कूटनीतिक तालमेल दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास भी बरकरार है। अगस्त 2025 में ट्रंप ने भारतीय निर्यातों पर 50% टैरिफ लगा दिया था, कारण- व्यापार असंतुलन और रूस से भारत की तेल खरीद।

हालांकि, इन तनावों के बीच भी नरमी के संकेत दिखे। सितंबर में ट्रंप ने मोदी को 75वें जन्मदिन पर कॉल किया। अक्टूबर में ट्रंप ने मोदी का गाज़ा शांति संदेश ट्रुथ सोशल पर रीपोस्ट किया। यह दिखाता है कि मतभेदों के बावजूद कूटनीति के स्तर पर रिश्तों को बचाए रखने की कोशिशें जारी हैं।

उम्मीदें और संशय

ट्रंप की पहल को एक “राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक” कहा जा सकता है। अगर गाज़ा में युद्धविराम होता है और बंधक सुरक्षित लौटते हैं, तो यह उनकी बड़ी उपलब्धि होगी, खासकर चुनावी साल में। लेकिन सबसे बड़ा सवाल वही है- क्या हमास वादे पर कायम रहेगा? इस संगठन का इतिहास पलटी मारने का रहा है। इज़रायल की चुप्पी भी बताती है कि विश्वास अभी दूर की चीज़ है।

भारत के लिए यह स्थिति अहम है। पश्चिम एशिया में स्थिरता सीधे तौर पर ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा से जुड़ी है। मोदी का इस पहल को समर्थन करना न सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार है, बल्कि भारत के दीर्घकालिक हितों के लिहाज़ से भी ज़रूरी है।

गाज़ा शांति योजना को लेकर दुनिया में उम्मीद और आशंका दोनों हैं। ट्रंप इसे अपनी “राजनीतिक जीत” साबित करना चाहते हैं, हमास दबाव में झुकता दिख रहा है, और भारत अपने संतुलित रुख से वैश्विक मंच पर गंभीर खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। लेकिन असली इम्तहान अब शुरू होता है- क्या यह समझौता कागज़ से निकलकर ज़मीन पर शांति लाएगा?

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