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भारत-चीन ने 2027 की बैठक भारत में कराने पर जताई सहमति, डोभाल बोले- ‘हम प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार हैं’

 
Ajeet
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भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ समय से लगातार सुधार के संकेत मिल रहे हैं। इसी कड़ी में 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक हुई। बैठक में भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी ने हिस्सा लिया।

बैठक में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान अजीत डोभाल ने भारत-चीन संबंधों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं।

डोभाल ने कहा कि पिछले एक साल में दोनों देशों के संबंध धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़े हैं। उनके मुताबिक, सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना रिश्तों में सुधार की सबसे अहम वजह रही है।

2027 में भारत में होगी अगली बैठक

बीजिंग में हुई इस बैठक की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि दोनों देशों ने अगली यानी 26वीं विशेष प्रतिनिधि बैठक को 2027 में भारत में आयोजित करने पर सहमति जताई है। इसे भारत-चीन संबंधों में आगे बढ़ते भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। साथ ही सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और आपसी सहमति के जरिए तलाशने पर भी जोर दिया गया।

गलवान के बाद बदले थे रिश्ते

साल 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में काफी तनाव पैदा हो गया था। दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की थी।

इसके बाद सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। धीरे-धीरे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए गए। देपसांग और डेमचोक जैसे क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को और गति मिली।

अब बीजिंग में हुई 25वीं बैठक से यह संकेत मिल रहा है कि दोनों देश टकराव की स्थिति से आगे बढ़कर संवाद और सहयोग की राह तलाश रहे हैं।

सिर्फ भारत-चीन ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए अहम

भारत और चीन एशिया की दो बड़ी ताकतें हैं और दोनों का वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव का असर केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यापार, वैश्विक सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीति पर भी पड़ता है।

अगर दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता आती है, तो इसका असर व्यापार और आर्थिक सहयोग पर भी देखने को मिल सकता है। BRICS और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देशों का सहयोग भी क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है।

बीजिंग में हुई बैठक और 2027 में भारत में होने वाली अगली बैठक को इसी बदलते रिश्ते की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि सीमा विवाद जैसे जटिल मुद्दे अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन बातचीत और आपसी संवाद का जारी रहना दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक बदलाव का संकेत जरूर है।