होरमुज हमले पर भारत का कड़ा रुख, भारतीय नाविक की मौत के बाद ईरानी उप-राजदूत तलब
India Iran News: होरमुज में यूएई के दो तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की मौत के बाद भारत ने कड़ा कूटनीतिक रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को ईरान के उप-राजदूत (Deputy Chief of Mission) समेत वरिष्ठ ईरानी राजनयिकों को तलब कर घटना पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई और विस्तृत जवाब मांगा।
भारतीय नागरिक की मौत के बाद भारत की सख्त प्रतिक्रिया
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने स्पष्ट किया कि ओमान के समुद्री क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हुआ हमला बेहद गंभीर मामला है। इस घटना में एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हुए। घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। इनमें चार की हालत गंभीर बताई गई है।
यूएई के दो तेल टैंकर बने निशाना
यूएई के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 'मोम्बासा' (Mombasa) और 'अल बहियाह' (Al Bahiyah) नामक दो तेल टैंकर होरमुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन पर मिसाइल हमला हुआ, जिससे दोनों जहाजों में आग लग गई। मृत भारतीय नाविक 'मोम्बासा' टैंकर पर तैनात था।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव बेहद चिंताजनक है। भारत ने सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने, बातचीत के जरिए समाधान निकालने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की अपील की है। मंत्रालय ने कहा कि व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाना स्वीकार्य नहीं है।
कूटनीतिक स्तर पर दर्ज कराया विरोध
भारतीय नागरिक की मौत के बाद विदेश मंत्रालय ने ईरान के उप-राजदूत मोहम्मद जवाद होसैनी को तलब कर भारत की गंभीर चिंता से अवगत कराया। सूत्रों के अनुसार, भारत ने घटना की जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग भी की है।
होरमुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?
होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने इस क्षेत्र को और संवेदनशील बना दिया है।
