क्या रूस से तेल खरीदना भारत के लिए पड़ेगा महंगा? अमेरिका के नए टैरिफ बिल में भारत-चीन समेत 10 देशों के नाम
India US Tariff: रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ का विवाद एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े एक संशोधित विधेयक को पेश करने की तैयारी है। इसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया है। भारत और चीन समेत करीब 10 देशों को इस प्रस्तावित कार्रवाई के दायरे में शामिल किया गया है।
अमेरिकी संसद में प्रस्तावित इस बिल को रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका का आरोप है कि रूस से कच्चे तेल की खरीदारी उसके राजस्व को मजबूत करती है और इससे यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को आर्थिक मदद मिलती है।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव
अमेरिकी संसद में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले मौजूदा कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा जा रहा है। इस संशोधित विधेयक में उन देशों पर माध्यमिक टैरिफ लगाने की व्यवस्था प्रस्तावित है, जो रूस से कच्चा तेल खरीद रहे हैं।
प्रस्ताव के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के प्रमुख तेल खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है। इसका सीधा असर उन देशों के अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार पर पड़ सकता है, जो रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखते हैं।
भारत और चीन समेत 10 देश निशाने पर
संशोधित विधेयक में भारत और चीन के अलावा तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक का नाम शामिल करने का प्रस्ताव है।
इन देशों को रूस के साथ तेल कारोबार करने वाले प्रमुख देशों के तौर पर प्रस्तावित कानून के दायरे में लाया जा सकता है। अगर यह प्रावधान कानून का हिस्सा बनता है और इसका इस्तेमाल किया जाता है, तो इन देशों से अमेरिका को होने वाले आयात पर भारी अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।
अमेरिका रूस से तेल खरीदने वालों पर क्यों सख्त है?
रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी 2022 से युद्ध जारी है। अमेरिका लंबे समय से रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि रूस को तेल और दूसरे ऊर्जा उत्पादों से होने वाली कमाई उसके युद्ध अभियान को जारी रखने में मदद करती है।
इसी वजह से अमेरिका अब केवल रूस पर सीधे प्रतिबंध लगाने के बजाय उन देशों पर भी दबाव बढ़ाना चाहता है, जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के तहत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि, इन प्रयासों से अभी तक युद्ध को पूरी तरह खत्म करने का रास्ता नहीं निकला है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। रूस से मिलने वाला तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण स्रोतों में शामिल है। ऐसे में अगर अमेरिका भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ भारतीय कंपनियों और निर्यातकों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, फिलहाल यह प्रस्तावित कानून है। केवल बिल में किसी देश का नाम शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि उस देश पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। आगे अमेरिकी संसद की प्रक्रिया और राष्ट्रपति के स्तर पर होने वाले फैसले महत्वपूर्ण होंगे।
BRICS मंच पर भी उठा था ट्रंप के टैरिफ का मुद्दा
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है, जब नई दिल्ली में हुए BRICS सम्मेलन में अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर चर्चा हुई थी।
BRICS सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी टैरिफ का विरोध करने और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अधिक निष्पक्षता की जरूरत पर जोर दिया था।
अब रूस से तेल खरीदने वाले देशों को प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ के दायरे में लाने की अमेरिकी कोशिश से भारत के सामने एक नया व्यापारिक और कूटनीतिक सवाल खड़ा हो सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिकी संसद में इस बिल की प्रक्रिया और भारत की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
