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ईरान ने अमेरिका के सामने रखा होर्मुज खोलने का प्लान, परमाणु बातचीत और युद्ध रोकने की भी शर्त

Iran Hormuz Plan: ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ युद्ध रोकने और परमाणु वार्ता आगे बढ़ाने की बात भी सामने आई है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग ने भी मध्य पूर्व युद्ध पर चर्चा की।
 
होर्मुज
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Iran Hormuz Plan: मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सात दिनों के भीतर फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, इसके लिए अमेरिका को सैन्य दबाव कम करने और ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील जैसे कदम उठाने होंगे। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अपनी बैठक में मध्य पूर्व के युद्ध पर चर्चा की।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। चीन भी मध्य पूर्व से होने वाली तेल आपूर्ति पर काफी निर्भर है, इसलिए इस संकट का बीजिंग के लिए भी खास महत्व है।

ईरान ने अमेरिका के सामने क्या प्रस्ताव रखा?

ईरान की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री आवाजाही के लिए खोलने की बात कही गई है। हालांकि, यह प्रस्ताव कुछ शर्तों से जुड़ा है।

ईरान चाहता है कि अमेरिका सैन्य दबाव कम करे और उसके बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटाए। इसके अलावा ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में राहत और युद्धविराम को लेकर भी बातचीत की बात सामने आई है। प्रस्ताव के तहत परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर शुरू करने का रास्ता भी खुल सकता है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी पक्ष के साथ संपर्क किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए वॉशिंगटन तक पहुंचाया गया था।

ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक में भी छाया मध्य पूर्व युद्ध

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शुक्रवार को हुई बैठक में भी मध्य पूर्व का युद्ध प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा।

चीन के लिए होर्मुज संकट खास तौर पर अहम है, क्योंकि वह मध्य पूर्व से आने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर काफी निर्भर है। होर्मुज के जरिए तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित होने से चीन समेत दुनिया के कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है।

दोनों नेताओं की बातचीत ऐसे समय हुई है जब युद्ध के कारण क्षेत्र में तेल और समुद्री परिवहन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है।

इस जलमार्ग में लंबे समय तक व्यवधान आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और एशिया सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। हाल के दिनों में होर्मुज को लेकर तनाव बढ़ने के साथ तेल बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है।

क्या सात दिन में खत्म हो सकता है होर्मुज संकट?

ईरान का प्रस्ताव निश्चित तौर पर कूटनीतिक रास्ता खोलने का संकेत देता है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य का पूरी तरह खुलना अभी किसी समझौते पर निर्भर है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य दबाव, प्रतिबंध, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय युद्ध को लेकर गंभीर मतभेद बने हुए हैं।

इसलिए सात दिन में जलडमरूमध्य खोलने की बात को फिलहाल एक प्रस्ताव के तौर पर ही देखा जा रहा है, न कि अंतिम समझौते के रूप में। अगर अमेरिका और ईरान के बीच इन शर्तों पर सहमति बनती है तो इसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने से वैश्विक तेल बाजार और मध्य पूर्व की स्थिति पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।