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मिडिल ईस्ट तनाव का असर दुनिया पर, बांग्लादेश में जेट ईंधन 80% महंगा

 
मिडिल ईस्ट तनाव का असर दुनिया पर, बांग्लादेश में जेट ईंधन 80% महंगा
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New Delhi/Dhaka : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट का असर अब दुनियाभर में दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। भारत में प्रीमियम पेट्रोल और औद्योगिक ईंधन (डीजल) के दाम बढ़ने के साथ एलपीजी की किल्लत से कुछ उद्योग प्रभावित हो रहे हैं, वहीं पड़ोसी देश बांग्लादेश की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।

बांग्लादेश में जेट ईंधन की कीमतों में भारी उछाल

ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश ऊर्जा नियामक आयोग (BERC) ने मंगलवार को जेट ईंधन की कीमतों में करीब 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी। यह एक महीने के भीतर दूसरी बार कीमतों में वृद्धि है। नए फैसले के बाद घरेलू हवाई ईंधन का दाम 112.41 टका से बढ़कर 202.29 टका प्रति लीटर हो गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए कीमत 0.7384 डॉलर से बढ़ाकर 1.3216 डॉलर प्रति लीटर कर दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान से जुड़े संघर्ष की शुरुआत के बाद से अब तक जेट ईंधन की कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी हो चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर हवाई किराए पर पड़ेगा, जिससे खासकर मिडिल ईस्ट में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों और यात्रियों की चिंताएं बढ़ सकती हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर स्थिति महत्वपूर्ण

इस बीच श्रीलंका में ईरान के राजदूत अलीरेज़ा दिलखुश ने कहा है कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz मित्र देशों के लिए खुला है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर ईरान श्रीलंका जैसे देशों को तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए तैयार है।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर पड़ा है, जहां से दुनिया की कुल ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। ऐसे में इस रास्ते में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहरा कर सकती है।

लंबा खिंच सकता है संकट

विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान से जुड़े इस संघर्ष को अब करीब चार सप्ताह हो चुके हैं। यदि क्षेत्र में तनाव जारी रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार, हवाई यात्रा और औद्योगिक उत्पादन पर इसका असर और बढ़ सकता है।