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अब Rare Earth पर नहीं चलेगी चीन की मनमानी! भारत-अमेरिका ने मिलकर बनाया नया मास्टरप्लान

Quad देशों ने Rare Earth Elements की सप्लाई चेन पर चीन की पकड़ कम करने के लिए ‘Quad Critical Mineral Framework’ लॉन्च किया है। इस ऐलान के बाद GMDC शेयरों में तेज उछाल आया। जानिए भारत की क्या होगी भूमिका और क्यों यह कदम चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

 
Rare Earth
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Quad Critical Mineral Framework: नई दिल्ली में आयोजित Quad विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एक ऐसा फैसला सामने आया है जिसने वैश्विक राजनीति से लेकर भारतीय शेयर बाजार तक हलचल मचा दी है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर ‘Quad Critical Mineral Framework’ लॉन्च किया है। इस नए फ्रेमवर्क का मकसद Rare Earth Elements और Critical Minerals की सप्लाई चेन पर चीन के दबदबे को कम करना है।

इस घोषणा के तुरंत बाद भारतीय शेयर बाजार में माइनिंग सेक्टर के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई। खासतौर पर सरकारी कंपनी GMDC के शेयरों में 5% से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई।

क्या है Quad का नया Critical Mineral Framework?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस नए फ्रेमवर्क की घोषणा करते हुए कहा कि यह रणनीतिक खनिजों के खनन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग को मजबूत करने के लिए एक गाइडलाइन की तरह काम करेगा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच निवेश समन्वय को बढ़ाना और क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), सेमीकंडक्टर और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए जरूरी खनिजों की सुरक्षित सप्लाई सुनिश्चित करना है।

क्यों मची GMDC शेयरों में खरीदारी?

Quad के इस ऐतिहासिक ऐलान के बाद निवेशकों ने तुरंत माइनिंग और मिनरल सेक्टर की कंपनियों पर दांव लगाना शुरू कर दिया। सरकारी कंपनी गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (GMDC) का शेयर करीब 5.4% चढ़कर ₹691 के स्तर तक पहुंच गया। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹22,000 करोड़ तक पहुंच गया है। पिछले एक साल में यह स्टॉक लगभग 91% का शानदार रिटर्न दे चुका है। चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक रणनीति में GMDC जैसी भारतीय कंपनियां सबसे बड़े फायदे में रह सकती हैं।

आखिर क्यों इतना अहम है Rare Earth Elements का खेल?

आज की दुनिया में स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), मिसाइल डिफेंस सिस्टम, AI सर्वर, बैटरियां और हाई-टेक चिप्स—सब कुछ Rare Earth Elements और Critical Minerals पर निर्भर है।

फिलहाल इन खनिजों की प्रोसेसिंग और सप्लाई पर चीन का लगभग 70% से 90% तक नियंत्रण माना जाता है। यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश चीन के इस एकाधिकार को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत को कैसे होगा फायदा?

Quad का यह नया फ्रेमवर्क भारत के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। भारत के पास विशाल खनिज संसाधन हैं और सरकार लगातार सेमीकंडक्टर, EV और क्लीन एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा दे रही है। अगर भारत Mining और Processing Infrastructure को तेजी से विकसित करता है, तो वह आने वाले वर्षों में ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम केंद्र बन सकता है।

चीन के लिए क्यों बड़ा झटका माना जा रहा?

चीन लंबे समय से Rare Earth और Critical Minerals की वैश्विक सप्लाई चेन पर दबदबा बनाए हुए है। अब Quad देशों की यह रणनीति सीधे उसी आर्थिक और रणनीतिक ताकत को चुनौती देती नजर आ रही है। विश्लेषकों के मुताबिक, अगर यह फ्रेमवर्क सफल हुआ तो आने वाले समय में चीन की वैश्विक टेक और मैन्युफैक्चरिंग पकड़ कमजोर पड़ सकती है।

ऊर्जा सुरक्षा पर भी Quad का फोकस

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि Quad देश केवल खनिजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पर भी मिलकर काम करेंगे।

अमेरिकी ऊर्जा विभाग इस साल के अंत में Quad देशों के लिए विशेष “Fuel Security Platform” की मेजबानी करेगा। भारत पहले ही अमेरिका समर्थित ‘Pax Silica’ पहल का हिस्सा बन चुका है, जिसका उद्देश्य AI और टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन को मजबूत करना है।

क्यों अहम माना जा रहा यह कदम?

दुनिया अब तेल से आगे बढ़कर Critical Minerals की जंग की तरफ बढ़ रही है। AI, EV और सेमीकंडक्टर की वैश्विक दौड़ में वही देश आगे रहेंगे जिनके पास मजबूत Rare Earth सप्लाई चेन होगी। ऐसे में Quad का यह नया फ्रेमवर्क आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक समीकरण बदल सकता है।