कोर्ट से झटका, फिर भी नहीं बदले ट्रंप! कंपनियों को लौटाने पड़े 71 अरब डॉलर, अब नए टैक्स लगाने की तैयारी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को मई और जून के दौरान करीब 71 अरब डॉलर (लगभग 5.8 लाख करोड़ रुपये) कंपनियों को वापस करने पड़े हैं। बताया जा रहा है कि यह केवल शुरुआती भुगतान है और कई कंपनियों का पैसा अभी भी लौटाया जाना बाकी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने अपने कार्यकाल में भारत, चीन, यूरोप समेत कई देशों से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया था। सरकार का तर्क था कि इससे विदेशी सामान महंगे होंगे, अमेरिकी उत्पादों की मांग बढ़ेगी और देश की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा।
हालांकि, इस फैसले का कई बड़ी अमेरिकी और वैश्विक कंपनियों ने विरोध किया और इसे अदालत में चुनौती दी। मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां इसी वर्ष फरवरी में अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाया गया यह टैरिफ कानून के अनुरूप नहीं था। कोर्ट के आदेश के बाद सरकार को कंपनियों से वसूली गई राशि ब्याज सहित लौटानी पड़ रही है।
दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप अपनी टैरिफ नीति से पीछे हटते नहीं दिख रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा टैरिफ व्यवस्था 24 जुलाई को समाप्त हो रही है, लेकिन ट्रंप प्रशासन अब 10 से 12.5 प्रतिशत तक का नया आयात शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। यदि ऐसा होता है तो भारत, चीन, ब्रिटेन, जापान और ताइवान जैसे देशों के निर्यात पर इसका असर पड़ सकता है।
इतना ही नहीं, ट्रंप ने ब्राजील पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी भी दी है। वहीं उन्होंने यूरोपीय देशों को भी आगाह किया है कि यदि वे अमेरिकी टेक कंपनियों, जैसे गूगल और एप्पल, पर अतिरिक्त कर लगाएंगे तो अमेरिका उनके उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने से पीछे नहीं हटेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप प्रशासन नई टैरिफ नीति लागू करता है, तो वैश्विक व्यापार में एक बार फिर तनाव बढ़ सकता है और कई देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
