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होर्मुज के बाद नया झटका? बाब-अल-मंडेब बंद हुआ तो क्या रुक जाएगी दुनिया की अर्थव्यवस्था?

अमेरिका की 5 दिन की डेडलाइन खत्म होने पर ईरान ने बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट बंद करने की चेतावनी दी है। इससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। होर्मुज और बाब-अल-मंडेब दोनों बाधित हुए तो 30% ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी और महंगाई बढ़ सकती है।

 
 बाब-अल-मंडेब बंद
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Iran US Tension : वैश्विक राजनीति में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। Donald Trump द्वारा ईरान को दिए गए पांच दिन के अल्टीमेटम की मियाद 27 मार्च को समाप्त हो रही है। यदि इस दौरान कोई शांति समझौता नहीं होता, तो अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई तेज किए जाने की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उसके द्वीपों पर हमला किया गया, तो वह महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को बाधित कर सकता है।

खर्ग द्वीप बन सकता है अगला निशाना

अमेरिका की संभावित कार्रवाई को लेकर आशंका जताई जा रही है कि वॉशिंगटन का अगला लक्ष्य ईरान का रणनीतिक रूप से अहम खर्ग द्वीप हो सकता है। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जिस पर हमला वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला सकता है।

बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट बंद करने की चेतावनी

ईरान ने साफ संकेत दिया है कि अगर उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई होती है, तो वह Strait of Hormuz के बाद अब Bab el-Mandeb Strait को भी बंद कर सकता है।
यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

दुनिया की 30% ऊर्जा सप्लाई पर खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है, जबकि बाब-अल-मंडेब से लगभग 12% कच्चे तेल की आपूर्ति होती है।

यदि दोनों मार्ग बाधित होते हैं, तो करीब 30% वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक महंगाई पर पड़ेगा।

लंबा रास्ता और बढ़ेगी लागत

यदि बाब-अल-मंडेब बंद होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। इससे डिलीवरी में देरी, बीमा लागत में वृद्धि और व्यापार पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।

IRGC की चेतावनी और बढ़ा तनाव

ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी है कि किसी भी जमीनी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा।

वॉइट हाउस ने भी स्पष्ट किया है कि यदि ईरान शर्तें नहीं मानता, तो सैन्य कार्रवाई की जाएगी।

हूती विद्रोहियों के जरिए नियंत्रण की रणनीति

बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट पर सीधे नियंत्रण की बजाय ईरान अपने सहयोगी गुटों का सहारा ले सकता है। यमन में सक्रिय हूती विद्रोही इस क्षेत्र में पहले भी हमले कर चुके हैं और जरूरत पड़ने पर इस स्ट्रेट को बाधित करने में ईरान की मदद कर सकते हैं।

भारत सहित कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इन समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि तनाव बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है और आम लोगों पर सीधा असर पड़ सकता है।