Movie prime

दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार ‘साउथ पार्स’ पर हमला, वैश्विक ऊर्जा के ग्लोबल सप्लाई चेन पर संकट मंडराया
 

 
 दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार ‘साउथ पार्स’ पर हमला, वैश्विक ऊर्जा के ग्लोबल सप्लाई चेन पर संकट मंडराया
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है, जहां इसका असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल-गैस आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता तक महसूस किया जाने लगा है। हाल ही में इजरायल द्वारा ईरान के सबसे बड़े गैस भंडार साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले को इस संघर्ष की अब तक की सबसे संवेदनशील और दूरगामी घटना माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला केवल सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि ईरान की ऊर्जा व्यवस्था और आर्थिक ताकत को कमजोर करने की एक बड़ी रणनीतिक कोशिश भी हो सकती है।

दरअसल, साउथ पार्स गैस फील्ड फारस की खाड़ी में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है। यह गैस क्षेत्र ईरान और कतर के बीच साझा है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 9,700 वर्ग किलोमीटर में फैला यह विशाल क्षेत्र ईरान की ऊर्जा प्रणाली का केंद्रीय स्तंभ है। आंकड़ों के अनुसार, यह गैस फील्ड अकेले ही ईरान के कुल गैस उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत उपलब्ध कराता है, जिससे देश की बिजली उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियों और घरेलू गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संचालित होता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस गैस फील्ड पर हमला ईरान की आर्थिक रीढ़ पर सीधा प्रहार है। अगर यहां उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर साफ तौर पर दिखाई दे सकता है। इतना ही नहीं, इससे वैश्विक गैस बाजार में भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, साउथ पार्स गैस फील्ड में करीब 51 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार मौजूद है। यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में गिना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या उत्पादन में बाधा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती है।

इस घटना का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी देखने को मिला है। हमले की खबर सामने आने के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों और व्यापारियों में संभावित आपूर्ति संकट की आशंका बढ़ने लगी है, जिसके कारण तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर पश्चिम एशिया में ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाने का सिलसिला जारी रहता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। कई देशों की अर्थव्यवस्था तेल और गैस आयात पर निर्भर है, ऐसे में आपूर्ति बाधित होने से महंगाई बढ़ने और आर्थिक अस्थिरता की स्थिति भी बन सकती है।

इतिहास भी बताता है कि युद्ध के दौरान ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान की भरपाई करना आसान नहीं होता। 2003 में इराक युद्ध के बाद वहां के ऊर्जा ढांचे को पूरी तरह बहाल करने में कई साल लग गए थे। इसी तरह यूक्रेन में भी युद्ध के कारण ऊर्जा प्रणाली की मरम्मत और पुनर्स्थापना लंबे समय तक प्रभावित रही है।

साउथ पार्स जैसा विशाल और तकनीकी रूप से जटिल गैस उत्पादन केंद्र अगर गंभीर रूप से प्रभावित होता है, तो उसकी मरम्मत और उत्पादन को पहले जैसा करने में लंबा समय लग सकता है। इससे न सिर्फ ईरान बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार भी दबाव में आ सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में पश्चिम एशिया की स्थिति पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी। अगर तनाव और बढ़ता है या ऊर्जा संरचनाओं को बार-बार निशाना बनाया जाता है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की कीमतों, वैश्विक व्यापार और आम लोगों की जीवन लागत पर पड़ सकता है। यही कारण है कि यह घटना अब सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनती जा रही है।