अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ट्रंप की नई कूटनीतिक चाल, ऊर्जा ठिकानों पर 6 अप्रैल तक बढ़ाई हमले की डेडलाइन
Mar 27, 2026, 07:41 IST
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वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमले की समय सीमा बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 कर दी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
ईरान के अनुरोध पर बढ़ाई गई डेडलाइन
ट्रंप ने कहा कि यह निर्णय ईरान के अनुरोध पर लिया गया है और दोनों देशों के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए यह भी कहा कि मीडिया में चल रही नकारात्मक खबरें भ्रामक हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल टैंकरों के लिए खोलने की मांग की गई थी। हालांकि अब इस डेडलाइन को दो बार बढ़ाया जा चुका है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका फिलहाल सैन्य कार्रवाई से पहले कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है।
ईरान की सख्त शर्तें
दूसरी ओर, ईरान ने भी बातचीत में अपनी स्पष्ट शर्तें रख दी हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने अमेरिका से मांग की है कि पहले उसके और उसके सहयोगी संगठनों पर हो रहे हमले बंद किए जाएं।
इसके साथ ही ईरान ने युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देने की मांग भी रखी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये शर्तें अमेरिका के प्रस्ताव से कहीं अधिक सख्त हैं।
बातचीत के बीच ट्रंप का सख्त संदेश
बातचीत जारी रहने के बावजूद ट्रंप का रुख पूरी तरह नरम नहीं हुआ है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के मुताबिक, ईरान के साथ बातचीत के लिए 15 बिंदुओं की योजना पाकिस्तान के जरिए भेजी गई है, जिस पर कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी साफ दिखाई दे रही है।
इजराइल में भी बढ़ी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजराइल में भी चिंता बढ़ने लगी है। विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सेना पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाला जा रहा है और बिना ठोस रणनीति के कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ी जा रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि सैनिकों की कमी और लगातार संघर्ष से हालात और गंभीर हो सकते हैं।
जमीन पर हालात अब भी तनावपूर्ण
कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद जमीनी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। ईरान पर लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। इनमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी के मारे जाने की भी सूचना है।
वहीं, जवाबी कार्रवाई में ईरान भी खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में डर और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।
ईरान के अनुरोध पर बढ़ाई गई डेडलाइन
ट्रंप ने कहा कि यह निर्णय ईरान के अनुरोध पर लिया गया है और दोनों देशों के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए यह भी कहा कि मीडिया में चल रही नकारात्मक खबरें भ्रामक हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल टैंकरों के लिए खोलने की मांग की गई थी। हालांकि अब इस डेडलाइन को दो बार बढ़ाया जा चुका है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका फिलहाल सैन्य कार्रवाई से पहले कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है।
ईरान की सख्त शर्तें
दूसरी ओर, ईरान ने भी बातचीत में अपनी स्पष्ट शर्तें रख दी हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने अमेरिका से मांग की है कि पहले उसके और उसके सहयोगी संगठनों पर हो रहे हमले बंद किए जाएं।
इसके साथ ही ईरान ने युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देने की मांग भी रखी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये शर्तें अमेरिका के प्रस्ताव से कहीं अधिक सख्त हैं।
बातचीत के बीच ट्रंप का सख्त संदेश
बातचीत जारी रहने के बावजूद ट्रंप का रुख पूरी तरह नरम नहीं हुआ है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के मुताबिक, ईरान के साथ बातचीत के लिए 15 बिंदुओं की योजना पाकिस्तान के जरिए भेजी गई है, जिस पर कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी साफ दिखाई दे रही है।
इजराइल में भी बढ़ी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजराइल में भी चिंता बढ़ने लगी है। विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सेना पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाला जा रहा है और बिना ठोस रणनीति के कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ी जा रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि सैनिकों की कमी और लगातार संघर्ष से हालात और गंभीर हो सकते हैं।
जमीन पर हालात अब भी तनावपूर्ण
कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद जमीनी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। ईरान पर लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। इनमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी के मारे जाने की भी सूचना है।
वहीं, जवाबी कार्रवाई में ईरान भी खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में डर और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।
