राफेल F5 प्रोग्राम में UAE की एंट्री, फ्रांस के साथ मिलकर करेगा डेवलपमेंट; भारत क्यों रह गया पीछे?
पेरिस: फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच राफेल लड़ाकू विमान के उन्नत वेरिएंट राफेल F5 के विकास को लेकर समझौता हुआ है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों देशों ने इस कार्यक्रम को लेकर साझा रणनीति पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत UAE, राफेल के नए वेरिएंट के विकास में फ्रांस के साथ सहयोग करेगा। इस घटनाक्रम की भारत के लिहाज से भी चर्चा हो रही है, क्योंकि भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं, लेकिन भारत इस विकास कार्यक्रम में शामिल नहीं है।
मैक्रों के UAE दौरे पर हुआ समझौता
डिफेंस 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 अक्टूबर को अबू धाबी के दौरे पर पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने राफेल के अगली पीढ़ी के वेरिएंट के विकास को लेकर नए अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक सहयोग और तकनीकी विकास पर जोर दिया गया है।
फ्रांस के लिए यह समझौता अहम माना जा रहा है, क्योंकि राफेल F5 जैसे उन्नत लड़ाकू विमान के विकास में भारी निवेश की जरूरत होगी। UAE की भागीदारी से इस कार्यक्रम की लागत और तकनीकी सहयोग से जुड़े कुछ बोझ को साझा करने का रास्ता खुल सकता है। इस परियोजना में फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन की भी अहम भूमिका है।
पहले तकनीक को लेकर अटक गई थी बातचीत
फ्रांस और UAE के बीच राफेल F5 कार्यक्रम को लेकर बातचीत पहले भी हुई थी, लेकिन संवेदनशील सैन्य तकनीक तक पहुंच के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए थे। खासतौर पर उन्नत ऑप्ट्रोनिक्स जैसी तकनीकों को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, UAE ने शुरुआत में करीब 5 अरब यूरो की अनुमानित परियोजना में 3.5 अरब यूरो तक योगदान देने की तैयारी दिखाई थी। हालांकि, तकनीक साझा करने को लेकर मतभेद के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
अब नए समझौते के साथ दोनों देशों ने फिर से सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाया है। इससे राफेल F5 के विकास कार्यक्रम को वित्तीय और औद्योगिक स्तर पर मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
भारत ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे थे और ये भारतीय वायुसेना की ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि, किसी विमान को खरीदना और उसके अगली पीढ़ी के वेरिएंट के विकास में साझेदार बनना दो अलग-अलग बातें हैं। UAE की राफेल F5 कार्यक्रम में भागीदारी ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत भी अपनी वायुसेना की क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है।
राफेल F5 को भविष्य की युद्ध जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाना है। ऐसे में इस कार्यक्रम में भागीदारी से जुड़े औद्योगिक और तकनीकी लाभ महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, भारत के लिए इसे सीधे तौर पर बड़ा झटका कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी, क्योंकि भारत की ओर से इस कार्यक्रम में शामिल होने या न होने के रणनीतिक कारणों पर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी जरूरी है।
