ट्रम्प-जिनपिंग की मुलाकात का अमेरिकी मीडिया ने किया बायकॉट, चीनी राष्ट्रपति ने कही ये बड़ी बात
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका पहुंच चुके हैं और गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी अहम मुलाकात हुई। यह दौरा एक दशक से अधिक समय बाद जिनपिंग की व्हाइट हाउस वापसी का भी गवाह बना है। दोनों नेताओं की बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), व्यापार, टैरिफ, दुर्लभ खनिज, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
बैठक के दौरान जिनपिंग ने अमेरिका और चीन के बीच टकराव से बचने और संवाद बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। AI को लेकर उन्होंने कहा कि इस तकनीक का नियंत्रण इंसानों के हाथ में रहना चाहिए। अमेरिका और चीन दोनों ही AI के क्षेत्र में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में AI सुरक्षा और इसके इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत को खास महत्व दिया जा रहा है। हाल ही में दोनों पक्षों के बीच AI से जुड़े जोखिमों और संभावित संवाद तंत्र पर भी चर्चा हुई थी।
वहीं, ट्रंप ने जिनपिंग के साथ अपने रिश्ते को 'शानदार दोस्ती' बताया और कहा कि अमेरिका और चीन के हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हालांकि, गर्मजोशी भरे स्वागत के बावजूद दोनों देशों के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर मतभेद कायम हैं। व्यापार और टैरिफ इनमें सबसे अहम हैं। इसके अलावा दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति, अमेरिकी चिप और तकनीकी प्रतिबंध, चीन की अमेरिकी बाजार तक पहुंच और कृषि उत्पादों की खरीद जैसे मुद्दे भी बातचीत के एजेंडे में हैं।
ट्रंप खुद एयरपोर्ट पहुंचे, जिनपिंग का किया स्वागत
जिनपिंग के अमेरिका पहुंचने पर ट्रंप खुद ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचे और उनका स्वागत किया। यह अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए असामान्य प्रोटोकॉल माना जा रहा है। ट्रंप के साथ फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप भी मौजूद थीं, जबकि जिनपिंग के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन अमेरिका आई हैं। व्हाइट हाउस के मुताबिक, दोनों नेताओं के लिए आधिकारिक स्टेट अराइवल सेरेमनी भी आयोजित की गई।
11 साल बाद व्हाइट हाउस लौटे जिनपिंग
जिनपिंग इससे पहले 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में व्हाइट हाउस आए थे। उस समय अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, जलवायु परिवर्तन और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिशें चल रही थीं। अब दोनों देशों का रिश्ता काफी बदल चुका है। AI, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज, सैन्य प्रतिस्पर्धा और ताइवान जैसे मुद्दे रिश्तों में तनाव के प्रमुख कारण हैं।
रेड कार्पेट पर गर्मजोशी, बातचीत में कई मुश्किल सवाल
ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात में सार्वजनिक तौर पर दोस्ती और सहयोग का संदेश दिखाई दिया, लेकिन बातचीत की मेज पर कई कठिन मुद्दे मौजूद हैं। व्यापार युद्ध के बाद दोनों देशों ने कुछ मोर्चों पर तनाव कम करने की कोशिश की है, लेकिन स्थायी समाधान अभी बाकी है। खासकर टैरिफ, दुर्लभ खनिज और तकनीकी प्रतिबंधों पर दोनों देशों के हित पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं।
AI पर सहयोग हुआ तो दुनिया पर पड़ेगा असर
AI इस बैठक का एक ऐसा मुद्दा है, जिसमें प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग की गुंजाइश भी दिखाई देती है। अमेरिका और चीन दोनों AI तकनीक में वैश्विक बढ़त चाहते हैं, लेकिन साथ ही साइबर हमले, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर खतरा और AI के नियंत्रण जैसे जोखिमों को लेकर चिंताएं भी सामने आ रही हैं। दोनों देशों के बीच AI सुरक्षा और संकट की स्थिति में सूचना साझा करने जैसे संभावित तंत्र पर बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है।
ताइवान और ईरान पर मतभेद
ताइवान अमेरिका और चीन के रिश्तों का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान के साथ सुरक्षा संबंध और सैन्य सहयोग बनाए रखता है। ऐसे में इस मुद्दे पर दोनों देशों की रणनीतिक चिंताएं अलग हैं।
ईरान भी बातचीत में एक अहम भू-राजनीतिक मुद्दा है। अमेरिका चीन से ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की उम्मीद करता है, जबकि बीजिंग तेहरान के साथ आर्थिक और ऊर्जा संबंध बनाए हुए है। ऐसे में ईरान को लेकर भी दोनों देशों के रुख में अंतर बना हुआ है।
मीडिया कवरेज पर भी विवाद
जिनपिंग की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब व्हाइट हाउस और कुछ बड़े अमेरिकी मीडिया संगठनों के बीच टकराव चल रहा है। CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच को लेकर विवाद के बीच एक संघीय जज ने 24 सितंबर को प्रशासन को इन संगठनों की पहुंच बहाल करने का आदेश दिया। हालांकि, आदेश के कुछ घंटे बाद भी इन संगठनों के पत्रकारों के रोके जाने की खबरें सामने आईं। इस विवाद के बीच प्रमुख अमेरिकी नेटवर्कों के प्रेस पूल ने ट्रंप के कुछ कार्यक्रमों की कवरेज रोक दी थी।
ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात को ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं एक तरफ व्यापार और तकनीक में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ AI जैसे वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की जरूरत भी महसूस कर रही हैं। इसलिए इस बैठक से निकलने वाले संकेत सिर्फ अमेरिका और चीन ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी नीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
