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रूस से तेल खरीदने वालों पर 100% टैरिफ की तैयारी, लेकिन खुद रूसी यूरेनियम खरीदेगा अमेरिका, नए बिल में क्या है?

अमेरिका के नए रूस प्रतिबंध बिल में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन पर भी इसका असर पड़ सकता है। लेकिन बिल में अमेरिकी नागरिक परमाणु सहयोग और कुछ रूसी यूरेनियम आयात को छूट दी गई है।
 
Russia Sanctions Bill
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Russia Sanctions Bill: रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका एक तरफ उन देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है, जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं, वहीं नए प्रतिबंध कानून में अपने लिए एक अहम छूट भी रखी गई है। अमेरिकी संसद के निचले सदन से आगे बढ़े इस बिल में नागरिक परमाणु सहयोग और रूस से कुछ यूरेनियम आयात के लिए रास्ता खुला रखा गया है।

यह प्रावधान इसलिए चर्चा में है क्योंकि अमेरिका लंबे समय से रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर दबाव बढ़ाता रहा है। प्रस्तावित कानून का निशाना रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देश हैं, लेकिन अमेरिकी परमाणु ईंधन जरूरतों से जुड़े कुछ लेनदेन को प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है।

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ

Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदना जारी रखते हैं या रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने में उसकी मदद करते हैं। यह बिल बुधवार को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से आगे बढ़ा।

इस प्रावधान का असर रूस के बड़े ऊर्जा खरीदारों पर पड़ सकता है। भारत और चीन भी रूसी तेल के बड़े खरीदार हैं और प्रस्तावित व्यवस्था के कारण इन देशों पर अमेरिकी व्यापारिक दबाव बढ़ सकता है।

पहले इस कानून के पुराने संस्करण में रूस से तेल, गैस और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। संशोधित प्रस्ताव में अधिकतम टैरिफ को 100 फीसदी किया गया है और इसे रूस के शीर्ष पांच ऊर्जा खरीदारों तक सीमित करने का प्रावधान रखा गया है।

फिर यूरेनियम पर अमेरिका को क्यों मिली छूट?

इस बिल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका न्यूक्लियर कार्व-आउट है। व्यापक रूस प्रतिबंधों के बावजूद कानून में अमेरिकी नागरिक परमाणु सहयोग और कुछ रूसी यूरेनियम आयात को छूट दी गई है।

इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका रूस के साथ हर तरह का परमाणु कारोबार खुला रख रहा है। बल्कि कुछ खास नागरिक परमाणु गतिविधियों और यूरेनियम से जुड़े आयात को प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है।

अमेरिका ने 2024 में रूसी यूरेनियम के आयात पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन घरेलू परमाणु ईंधन जरूरतों को देखते हुए कुछ परिस्थितियों में छूट का प्रावधान 2028 तक रखा गया है।

अमेरिका के लिए रूसी यूरेनियम क्यों अहम है?

अमेरिकी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र लंबे समय से वैश्विक यूरेनियम सप्लाई चेन पर निर्भर रहा है। रूस परमाणु ईंधन से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। ऐसे में मॉस्को पर व्यापक प्रतिबंध लगाते समय अमेरिका को अपनी नागरिक परमाणु ऊर्जा और परमाणु ईंधन की जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है।

यही वजह है कि प्रस्तावित प्रतिबंध कानून में परमाणु क्षेत्र के कुछ लेनदेन को अलग रखा गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के बावजूद अमेरिका कुछ रणनीतिक क्षेत्रों में तत्काल और पूरी तरह संबंध तोड़ने की स्थिति में नहीं है।

भारत और चीन पर क्यों पड़ सकता है असर?

प्रस्तावित कानून में रूस के शीर्ष तेल और गैस खरीदारों को टैरिफ के दायरे में लाने की बात है। भारत और चीन रूस के प्रमुख तेल खरीदारों में शामिल हैं। ऐसे में अगर कानून लागू होता है और दोनों देश निर्धारित श्रेणी में बने रहते हैं, तो उनके अमेरिकी बाजार में जाने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ का जोखिम बढ़ सकता है।

अमेरिका का तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद के जरिए मिलने वाले राजस्व से मॉस्को को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद मिलती है। इसी आर्थिक दबाव को बढ़ाने के लिए वॉशिंगटन रूस के साथ कारोबार करने वाले तीसरे देशों को भी निशाने पर लेने की कोशिश कर रहा है।

यूरोपीय देशों को भी कुछ राहत

बिल में कुछ ऐसे यूरोपीय देशों के लिए भी अपवाद का प्रावधान है, जिनका रूस से प्राकृतिक गैस आयात रूस के कुल गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम है और जो रूसी गैस पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

इसके अलावा अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को हर 180 दिन में रूस के शीर्ष पांच तेल या गैस खरीदारों की सूची की समीक्षा करने और खरीद पैटर्न में बदलाव के आधार पर टैरिफ व्यवस्था को समायोजित करने का अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव है।

बिल का नाम Lindsey Graham के नाम पर

इस कानून का नाम Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 रखा गया है। यह दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने रूस पर कड़े प्रतिबंधों की पैरवी की थी।

कानून का उद्देश्य रूस के राजनीतिक नेतृत्व, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। साथ ही रूस के ऊर्जा खरीदारों पर संभावित टैरिफ के जरिए मॉस्को की कमाई पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की कोशिश की गई है।

क्या अमेरिका खुद विरोधाभास में फंस रहा है?

बिल का यूरेनियम अपवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ओर अमेरिका रूस से ऊर्जा खरीदने वाले दूसरे देशों पर आर्थिक कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी परमाणु ईंधन जरूरतों के लिए कुछ रूसी आपूर्ति को प्रतिबंधों से बाहर रख रहा है।

हालांकि, यह छूट सीमित परमाणु गतिविधियों और कुछ यूरेनियम आयात तक है। इसलिए इसे रूस के साथ पूरे परमाणु कारोबार को सामान्य बनाने के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह प्रावधान मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिक परमाणु क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर रखा गया है।