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ठंडक, एनर्जी और फिटनेस सब एक साथ...गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाएगा सत्तू, जानें जौ या चना कौन सा बेहतर?

 
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गर्मी का मौसम आते ही डाइट में सत्तू शामिल करने की सलाह दी जाती है। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में इसे पारंपरिक सुपरफूड माना जाता है। खासतौर पर अक्षय तृतीया के बाद सत्तू खाने की परंपरा शुरू हो जाती है। यह शरीर को ठंडक देता है, डिहाइड्रेशन से बचाता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है। मार्केट में जौ का सत्तू और चना का सत्तू मिलता है। ऐसे में लोग कंफ्यूज रहते हैं कि कौन सा सत्तू खाना सही होता है। चने का या जौ का सत्तू क्या ज्यादा फायदेमंद है। आइये जानते हैं दोनों में क्या अंतर है और कौन सा पेट के लिए अच्छा है।

जौ या चना सत्तू: कौन सा बेहतर?

जौ का सत्तू (Barley Sattu)
तासीर ठंडी होती है, इसलिए गर्मी में ज्यादा फायदेमंद
पाचन कमजोर हो तो बेहतर विकल्प
डायबिटीज, कब्ज और हाई BP में लाभकारी
वजन घटाने वालों के लिए अच्छा

जिन लोगों को पेट से जुड़ी समस्या रहती है, उनके लिए जौ का सत्तू ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

चना का सत्तू (Gram Sattu)


प्रोटीन से भरपूर, मसल्स बनाने में मददगार
इम्यूनिटी बढ़ाता है
लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता
हड्डियों को मजबूत बनाता है

अगर आप प्रोटीन और ताकत बढ़ाना चाहते हैं, तो चना सत्तू बेहतर विकल्प है।

सत्तू के जबरदस्त फायदे

शरीर को ठंडा रखता है और लू से बचाता है
तुरंत एनर्जी देता है
फाइबर और प्रोटीन से भरपूर
ब्लड शुगर कंट्रोल में मददगार
वजन घटाने में सहायक
दिल को स्वस्थ रखने में मदद

डॉक्टर इसे “देसी प्रोटीन ड्रिंक” भी कहते हैं, क्योंकि यह आसानी से पच जाता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है।

सत्तू खाने का सही तरीका

आप सत्तू को कई तरह से डाइट में शामिल कर सकते हैं:

नमकीन सत्तू:

पानी में सत्तू घोलकर उसमें नींबू, काला नमक, भुना जीरा, प्याज और पुदीना मिलाएं

मीठा सत्तू:

दूध या पानी में सत्तू डालकर चीनी या बूरा मिलाएं

लस्सी स्टाइल:

दही के साथ मिलाकर ठंडा पेय बना सकते हैं