Movie prime

क्या आपकी प्लेट में है 'साइलेंट किलर'? कड़ाही का बचा तेल दोबारा इस्तेमाल करना हो सकता है जानलेवा

 
...
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

घरों में अक्सर पकौड़े, पूड़ी या अन्य तली हुई चीजें बनाने के बाद कड़ाही में तेल बच जाता है। कई लोग इस तेल को फेंकने की बजाय दोबारा इस्तेमाल कर लेते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की सलाह है कि तेल का बार-बार उपयोग करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

तीन बार से ज्यादा तेल गर्म करना खतरनाक

FSSAI के अनुसार, खाना पकाने वाले तेल को तीन बार से अधिक दोबारा गर्म नहीं करना चाहिए। बार-बार गर्म करने पर तेल में टोटल पोलर कंपाउंड (TPC) नामक हानिकारक तत्व बनने लगते हैं। यदि इनकी मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक हो जाए, तो ऐसा तेल भोजन बनाने के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता।

बार-बार गर्म करने से तेल में क्या बदलाव आते हैं?

तेल को तेज आंच पर बार-बार गर्म करने से उसमें ऑक्सीकरण (Oxidation) की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके कारण एल्डिहाइड्स, फ्री रेडिकल्स और ट्रांस फैट जैसे हानिकारक तत्व बनने लगते हैं। ये शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक ऐसे तेल का सेवन करने से हृदय रोग, लिवर संबंधी समस्याएं, शरीर में सूजन और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

बचा हुआ तेल कितने दिन तक इस्तेमाल करना चाहिए?

यदि तेल दोबारा इस्तेमाल करना जरूरी हो, तो सबसे पहले उसे अच्छी तरह छान लें, ताकि उसमें मौजूद खाने के छोटे-छोटे कण निकल जाएं। इसके बाद तेल को एयरटाइट कंटेनर में भरकर ठंडी और सूखी जगह पर रखें।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसे तेल का उपयोग 1 से 2 दिन के भीतर और केवल एक बार ही करना चाहिए। लंबे समय तक रखा हुआ या बार-बार गर्म किया गया तेल स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।

इन बातों का रखें खास ध्यान
तेल को तीन बार से ज्यादा दोबारा गर्म न करें।
इस्तेमाल के बाद तेल को छानकर ही स्टोर करें।
तेल को हमेशा बंद डिब्बे में ठंडी और सूखी जगह पर रखें।
यदि तेल का रंग गहरा हो जाए, बदबू आने लगे या धुआं ज्यादा निकले, तो उसे दोबारा इस्तेमाल न करें।
बार-बार तला हुआ तेल नियमित रूप से खाने से बचें।

विशेषज्ञों का कहना है कि ताजा तेल का इस्तेमाल करना हमेशा बेहतर विकल्प है। इससे भोजन की गुणवत्ता भी बनी रहती है और लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम होते हैं।