Movie prime

कहीं आप भी तो नहीं खरीद रहे केमिकल से पका केला, जानें कैसे करें पहचान

 
...
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

हम जब भी बाजार से केला खरीदने जाते हैं तो आमतौर पर उसका रंग, आकार और कीमत देखकर ही फैसला कर लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बाजार में कुछ केले एक साथ और बहुत जल्दी कैसे पक जाते हैं? ऐसे में मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं इन्हें जल्दी पकाने के लिए किसी प्रतिबंधित केमिकल का इस्तेमाल तो नहीं किया गया। आइए जानते है कि केमिकल वाले केले की पहचान कैसे करें...

फलों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल की बात अक्सर सामने आती है। हालांकि, हर जल्दी पका या पीला केला कैल्शियम कार्बाइड से पकाया गया हो, यह जरूरी नहीं है। FSSAI के मुताबिक फलों को पकाने के लिए नियंत्रित और निर्धारित तरीके से एथिलीन गैस का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि कैल्शियम कार्बाइड से फलों को पकाना प्रतिबंधित है। ऐसे में सवाल है कि केला खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें और क्या सिर्फ देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि केला प्राकृतिक तरीके से पका है या किसी गलत तरीके से?

बाहर से पीला, लेकिन अंदर से कच्चा?

अगर केले का छिलका काफी पीला दिखाई दे, लेकिन उसे काटने पर अंदर का गूदा बहुत सख्त हो और स्वाद भी कच्चे केले जैसा लगे, तो थोड़ा सतर्क होने की जरूरत है। गलत तरीके से पकाए गए फल कई बार असमान रूप से पक सकते हैं और उनकी बनावट व स्वाद सामान्य पके फल से अलग हो सकता है।

हालांकि, सिर्फ इस एक संकेत के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि केला कैल्शियम कार्बाइड से ही पकाया गया है। केले की किस्म, तापमान और पकने की अवस्था भी उसके रंग और स्वाद को प्रभावित करती है।

सिर्फ पीला रंग देखकर न खरीदें

आमतौर पर केला पकने के साथ उसके छिलके का रंग धीरे-धीरे हरे से पीले और फिर ज्यादा पके होने पर धब्बेदार होने लगता है। इसलिए केवल बहुत पीला रंग देखकर केले को पूरी तरह पका हुआ मान लेना सही नहीं है।

अगर केले का रंग बाहर से काफी बदल गया है, लेकिन अंदर की बनावट अभी भी कच्ची या सख्त है, तो उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, यहां भी किसी रसायन के इस्तेमाल की पुष्टि केवल देखकर नहीं की जा सकती।

खुशबू और स्वाद भी बताते हैं काफी कुछ

अच्छी तरह पके केले में सामान्य तौर पर एक खास प्राकृतिक खुशबू और मिठास होती है। अगर केला बाहर से पीला होने के बावजूद बहुत फीका लगे, उसमें सामान्य खुशबू न हो या स्वाद अजीब लगे, तो उसे खाने से बचना बेहतर है।

FSSAI के अनुसार फल पकने की प्रक्रिया में उसके रंग, मिठास, अम्लता, बनावट और खुशबू में बदलाव आता है। इसलिए केले की पहचान सिर्फ उसके छिलके के रंग से नहीं, बल्कि उसकी पूरी स्थिति देखकर करनी चाहिए।

बहुत जल्दी नरम होकर खराब हो रहा है केला?

अगर केला खरीदने के तुरंत बाद असामान्य रूप से तेजी से नरम होने लगे और जल्दी खराब हो जाए, तो इस पर भी ध्यान दिया जा सकता है। FSSAI की जानकारी में कैल्शियम कार्बाइड से पकाए गए फलों को असमान रूप से पकने और कम समय तक टिकने जैसी समस्याओं से जोड़ा गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जल्दी खराब होने वाला हर केला केमिकल से पकाया गया है। खासकर गर्म मौसम में केले प्राकृतिक रूप से भी तेजी से पकते और खराब हो सकते हैं।

क्या देखकर पक्का पता लगाया जा सकता है?

सबसे अहम बात यह है कि सिर्फ देखकर यह पक्के तौर पर पता लगाना मुश्किल है कि किसी केले को प्रतिबंधित रसायन से पकाया गया है या नहीं। इसलिए किसी एक लक्षण को देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय फल की कुल गुणवत्ता पर ध्यान देना बेहतर है।

FSSAI उपभोक्ताओं को भरोसेमंद विक्रेताओं और प्रतिष्ठित दुकानों से फल खरीदने की सलाह देता है। केले में असामान्य रंग, स्वाद, खुशबू या बनावट नजर आए तो ऐसे फल को खरीदने से बचना बेहतर है।

प्राकृतिक रूप से पका और एथिलीन से पका केला एक बात नहीं

यह समझना भी जरूरी है कि हर कृत्रिम रूप से पकाया गया केला नुकसानदायक नहीं होता। निर्धारित प्रक्रिया के तहत एथिलीन गैस का इस्तेमाल फलों को पकाने के लिए किया जा सकता है। वहीं कैल्शियम कार्बाइड जैसे प्रतिबंधित पदार्थों का इस्तेमाल अलग मामला है। इसलिए बाजार में पीला और जल्दी पका केला देखकर तुरंत यह मान लेना कि उसमें केमिकल का इस्तेमाल हुआ है, सही नहीं होगा।

केला खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

- केवल चमकीले पीले रंग को देखकर केला न खरीदें।

- फल की पूरी बनावट और पकने की अवस्था देखें।

- केला बहुत सख्त हो या अंदर से कच्चा लगे तो सावधानी बरतें।

- असामान्य स्वाद या गंध वाला केला न खरीदें।

- भरोसेमंद दुकानदार या प्रतिष्ठित विक्रेता से ही फल खरीदने की कोशिश करें।

- गर्म मौसम में केला स्वाभाविक रूप से जल्दी पक सकता है, इसलिए केवल जल्दी खराब होने को केमिकल का सबूत न मानें।