Movie prime

दाल पकाते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 7 गलतियां? स्वाद के साथ पोषण पर भी पड़ सकता है असर

 
Daal
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

दाल भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है। अरहर, मूंग, मसूर, चना और उड़द जैसी दालें स्वाद के साथ शरीर को प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व भी देती हैं। खासकर शाकाहारी लोगों के लिए दाल प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यही वजह है कि दाल-चावल से लेकर दाल-रोटी तक, यह भोजन लगभग हर घर में पसंद किया जाता है।

हालांकि, दाल बनाते समय की गई कुछ छोटी-छोटी गलतियां उसके स्वाद, बनावट और पोषण पर असर डाल सकती हैं। दाल को सही तरीके से भिगोना, पकाना और स्टोर करना इसके पोषक तत्वों का बेहतर लाभ पाने में मददगार होता है। आइए जानते हैं दाल पकाते समय किन 7 गलतियों से बचना चाहिए।

1. दाल को बिना भिगोए पकाना

कई लोग समय बचाने के लिए दाल को धोकर सीधे कुकर में चढ़ा देते हैं। हालांकि, कुछ दालों को पकाने से पहले भिगोना फायदेमंद होता है। इससे दाल जल्दी और समान रूप से पक सकती है। भिगोने से दाल में मौजूद फाइटेट्स की मात्रा भी कुछ हद तक कम हो सकती है, जिससे आयरन और जिंक जैसे खनिजों के अवशोषण में मदद मिलती है।

मूंग और मसूर जैसी छोटी दालों को कम समय तक भिगोना पर्याप्त हो सकता है, जबकि चना और साबुत उड़द जैसी दालों को अधिक समय तक भिगोने की जरूरत पड़ती है। इसलिए दाल के प्रकार के अनुसार भिगोने का समय तय करें।

2. दाल को जरूरत से ज्यादा पकाना

दाल को अच्छी तरह गलाना जरूरी है, लेकिन उसे जरूरत से ज्यादा देर तक पकाने से स्वाद और बनावट प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक पकाने से कुछ गर्मी के प्रति संवेदनशील विटामिनों की मात्रा कम हो सकती है। हालांकि, यह कहना सही नहीं है कि ज्यादा पकाने से दाल का पूरा प्रोटीन नष्ट हो जाता है। प्रोटीन गर्मी के प्रभाव से अपनी संरचना बदल सकता है, लेकिन इससे वह अपने आप बेकार नहीं हो जाता।

इसलिए दाल को इतना ही पकाएं कि वह अच्छी तरह गल जाए। प्रेशर कुकर में पकाते समय दाल के प्रकार और पानी की मात्रा के हिसाब से सीटी और समय का ध्यान रखें।

3. दाल में बेकिंग सोडा डालना

कुछ लोग दाल को जल्दी गलाने के लिए उसमें चुटकी भर बेकिंग सोडा डाल देते हैं। इससे दाल जल्दी नरम हो सकती है, लेकिन इसका नियमित इस्तेमाल जरूरी नहीं है। बेकिंग सोडा दाल के पानी का पीएच बदल देता है और कुछ विटामिनों के नुकसान को बढ़ा सकता है। इससे दाल के स्वाद और बनावट पर भी असर पड़ सकता है।

दाल को जल्दी पकाने के लिए उसे पहले से भिगोना और पर्याप्त पानी के साथ पकाना बेहतर विकल्प है। खासकर चना और साबुत दालों को भिगोने से पकाने का समय कम किया जा सकता है।

4. दाल को चावल या रोटी के साथ न खाना

दाल प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, लेकिन उसमें कुछ जरूरी अमीनो एसिड की मात्रा अनाज की तुलना में कम होती है। वहीं, अनाज में कुछ दूसरे अमीनो एसिड अपेक्षाकृत कम पाए जाते हैं। ऐसे में दाल को चावल, गेहूं की रोटी या बाजरे जैसे अनाज के साथ खाने से भोजन में अमीनो एसिड का बेहतर संतुलन मिल सकता है।

यही वजह है कि दाल-चावल और दाल-रोटी जैसे पारंपरिक भारतीय भोजन पोषण के लिहाज से अच्छे विकल्प माने जाते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दाल को अकेले खाने पर शरीर उसके प्रोटीन का इस्तेमाल नहीं कर सकता। संतुलित आहार में दिनभर अलग-अलग खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी फायदेमंद होता है।

5. दाल को बार-बार गर्म करना

कई घरों में एक बार ज्यादा दाल बना ली जाती है और उसे कई बार गर्म करके खाया जाता है। बार-बार गर्म करने से स्वाद और बनावट में बदलाव आ सकता है। इसके अलावा, दाल को लंबे समय तक गलत तरीके से रखने पर उसमें हानिकारक बैक्टीरिया पनपने का खतरा भी रहता है।

बेहतर है कि दाल को पकाने के बाद जल्द ठंडा करके फ्रिज में रखें और जरूरत के मुताबिक ही दोबारा गर्म करें। हर बार पूरी दाल गर्म करने के बजाय उतनी ही मात्रा निकालें, जितनी खानी हो। दाल को अच्छी तरह गर्म करके खाएं और लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न छोड़ें।

6. तड़के के लिए तेल को बहुत ज्यादा गर्म करना

दाल में जीरा, हींग, लहसुन और सूखी लाल मिर्च का तड़का उसके स्वाद को बढ़ा देता है। लेकिन तेल या घी को इतना गर्म कर देना कि मसाले जलने लगें, सही तरीका नहीं है। जले हुए मसालों से स्वाद खराब हो सकता है और बहुत अधिक तापमान पर तेल के गुण भी प्रभावित हो सकते हैं।

तड़का लगाते समय मध्यम आंच रखें। तेल या घी गर्म होने पर जीरा, हींग और दूसरे मसाले डालें और उन्हें जलने से पहले ही दाल में मिला दें। इससे दाल का स्वाद भी अच्छा रहेगा और तड़के का सही इस्तेमाल भी हो सकेगा।

7. दाल पकाने के बाद उसका पानी फेंक देना

दाल पकाने के बाद अगर आप उसका पानी अलग करके फेंक देते हैं, तो ऐसा करने से बचें। दाल पकने के दौरान कुछ पानी में घुलनशील पोषक तत्व पानी में आ सकते हैं। इस पानी में दाल का स्वाद और कुछ पोषण भी मौजूद रहता है।

इसलिए दाल को जरूरत के मुताबिक पानी डालकर पकाएं और बचे हुए पानी को फेंकने के बजाय दाल में ही मिला लें। इससे दाल की सही गाढ़ापन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। अगर किसी खास रेसिपी में पानी अलग करना जरूरी हो, तो उसे सूप या दूसरी डिश में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 दाल का पूरा पोषण पाने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

दाल को पौष्टिक बनाने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है। बस उसे सही तरीके से साफ करें, जरूरत के अनुसार भिगोएं, पर्याप्त पानी में अच्छी तरह पकाएं और जलने से बचाते हुए तड़का लगाएं। साथ ही, दाल को चावल, रोटी या अन्य अनाज के साथ खाना और बचे हुए भोजन को सही तरीके से फ्रिज में रखना भी जरूरी है।

ध्यान रखें: दाल प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है, लेकिन किसी एक तरीके से पकाने पर उसके सभी पोषक तत्व खत्म नहीं हो जाते। सही पकाने की विधि, संतुलित भोजन और सुरक्षित भंडारण से आप दाल का बेहतर पोषण और स्वाद दोनों पा सकते हैं।