भारत में चुपचाप बढ़ रही है फैटी लिवर की बीमारी, ये 5 संकेत कभी न करें अनदेखा
New Delhi : भारत में बदलती लाइफस्टाइल के चलते फैटी लिवर (Non-Alcoholic Fatty Liver Disease) तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि देश के करीब 38% वयस्क इस बीमारी से प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
1. हर वक्त बनी रहने वाली थकान
लिवर शरीर में पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदलता है। जब इसमें चर्बी जमा हो जाती है, तो यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है। नतीजतन, भरपूर आराम के बाद भी दिनभर भारीपन, सुस्ती और थकावट महसूस होती है। इसे अक्सर लोग तनाव या ज्यादा काम का असर समझकर अनदेखा कर देते हैं।
2. पेट और कमर के आसपास बढ़ती चर्बी
फैटी लिवर का एक मुख्य संकेत है पेट और कमर के आसपास अतिरिक्त चर्बी का जमना। बाहरी रूप से व्यक्ति दुबला-पतला दिख सकता है, लेकिन अंदरूनी अंगों के आसपास जमा फैट खतरनाक होता है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस और खराब मेटाबॉलिक हेल्थ का संकेत भी हो सकता है।
3. दाईं पसलियों के नीचे भारीपन या हल्का दर्द
पेट के दाहिने हिस्से में पसलियों के नीचे हल्का दर्द या भारीपन महसूस होना लिवर में समस्या का संकेत हो सकता है। यह तेज़ दर्द नहीं होता, बल्कि दबाव या जकड़न जैसा महसूस होता है। थकान और वजन बढ़ने के साथ यह लक्षण गंभीर हो सकता है।
4. इंसुलिन रेजिस्टेंस के हल्के संकेत
फैटी लिवर अक्सर इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा होता है। इसके संकेत हैं: खाने के थोड़ी देर बाद फिर भूख लगना, अचानक एनर्जी गिर जाना, या गर्दन और बगल के आसपास त्वचा का काला पड़ना। ये लक्षण अक्सर डायबिटीज से पहले दिखाई देते हैं।
5. बार-बार मितली और भूख कम लगना
लिवर चर्बी और टॉक्सिन्स को सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता, जिससे पाचन से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं। हल्की मितली, पेट भरा-भरा लगना या खाने में मन न लगना इसके संकेत हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि इन शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। शुरुआती जांच अल्ट्रासाउंड या लिवर फंक्शन टेस्ट से की जा सकती है। समय रहते निदान और जीवनशैली में बदलाव से फैटी लिवर को नियंत्रित किया जा सकता है।
