Hepatitis B-C हैं 'साइलेंट किलर'! जानिए किन लोगों को तुरंत करानी चाहिए जांच और कैसे करें बचाव
हेपेटाइटिस B और C लंबे समय तक बिना लक्षण के लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। फोर्टिस के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. रिंकेश कुमार बंसल ने बताया है कि किन लोगों को हेपेटाइटिस की जांच जरूर करानी चाहिए, कब स्क्रीनिंग जरूरी होती है और इससे बचाव के प्रभावी तरीके क्या हैं।
Hepatitis B-C Symptoms: हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई मामलों में लंबे समय तक इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। खासकर हेपेटाइटिस B और C धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाते रहते हैं और मरीज को इसकी जानकारी तब होती है, जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। ऐसे में समय पर जांच और सही इलाज ही सबसे बड़ा बचाव माना जाता है। फोर्टिस अस्पताल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. रिंकेश कुमार बंसल ने बताया है कि किन लोगों को हेपेटाइटिस की जांच जरूर करानी चाहिए।
हेपेटाइटिस क्यों है खतरनाक?
हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है—A, B, C, D और E। इनमें हेपेटाइटिस B और C को सबसे ज्यादा गंभीर माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये वायरस कई साल तक शरीर में बिना किसी स्पष्ट संकेत के मौजूद रह सकते हैं। इस दौरान यह धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाते रहते हैं। जब तक पीलिया, लगातार थकान, भूख कम लगना या पेट में दर्द जैसे लक्षण सामने आते हैं, तब तक कई मरीजों में लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी गंभीर स्थिति विकसित हो चुकी होती है।
किन लोगों को जरूर करानी चाहिए हेपेटाइटिस की जांच?
डॉ. रिंकेश कुमार बंसल के अनुसार, हर व्यक्ति को नियमित रूप से हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग कराने की जरूरत नहीं होती। हालांकि कुछ लोगों के लिए यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।
जिन लोगों को कभी संक्रमित रक्त (ब्लड) चढ़ाया गया हो, असुरक्षित इंजेक्शन लगवाया हो, टैटू बनवाया हो या जो लंबे समय से डायलिसिस पर हों, उन्हें हेपेटाइटिस B और C की जांच जरूर करानी चाहिए। इसके अलावा डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी, जो संक्रमित रक्त या मरीजों के सीधे संपर्क में रहते हैं, उन्हें भी समय-समय पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
यदि परिवार में किसी सदस्य को हेपेटाइटिस B या C है, तो बाकी सदस्यों की जांच भी जरूरी मानी जाती है। गर्भवती महिलाओं को भी हेपेटाइटिस B की जांच कराने की सलाह दी जाती है, ताकि संक्रमण नवजात शिशु तक न पहुंचे।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर लंबे समय से लगातार थकान महसूस हो रही है, पीलिया की शिकायत है, भूख कम लग रही है, पेट में सूजन रहती है या किसी भी तरह की लिवर संबंधी समस्या सामने आ रही है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर तुरंत हेपेटाइटिस की जांच करानी चाहिए। समय रहते बीमारी का पता चलने से इलाज आसान हो जाता है और गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव होता है।
क्या हेपेटाइटिस से बचाव संभव है?
विशेषज्ञों के अनुसार, हेपेटाइटिस B से बचाव के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है, इसलिए टीकाकरण सबसे मजबूत सुरक्षा कवच माना जाता है। वहीं, हेपेटाइटिस C का अभी टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन समय पर पहचान होने पर इसका सफल इलाज संभव है। इसलिए सुरक्षित जीवनशैली अपनाना, संक्रमित सुई या ब्लड से बचना और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. रिंकेश कुमार बंसल का कहना है कि हेपेटाइटिस जैसी बीमारी में जागरूकता सबसे बड़ी दवा है। सही समय पर स्क्रीनिंग, शुरुआती पहचान और उचित इलाज से लिवर को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। यदि आप जोखिम वाले समूह में आते हैं, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेकर हेपेटाइटिस की जांच जरूर कराएं।
