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30 के बाद तेजी से घटने लगती हैं मांसपेशियां? डाइट में शामिल करें ये 6 हाई-प्रोटीन फूड, लंबे समय तक रहेंगे मजबूत

30 की उम्र के बाद मांसपेशियों का मास और ताकत धीरे-धीरे कम हो सकती है। सारकोपेनिया से बचाव और मसल्स को मजबूत रखने के लिए प्रोटीन अहम है। जानिए काला चना, अंडा, मूंग दाल, पनीर, सोयाबीन और दही जैसे हाई-प्रोटीन फूड्स को डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं।
 
High Protein Foods for Muscle Strength
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High Protein Foods for Muscle Strength: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं और मांसपेशियों की ताकत भी धीरे-धीरे कम हो सकती है। 30 की उम्र के बाद हर दशक में मांसपेशियों के मास में कुछ कमी आना सामान्य माना जाता है। लंबे समय तक इस पर ध्यान न देने पर कमजोरी, सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी और पकड़ कमजोर होने जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। इस स्थिति को सारकोपेनिया (Sarcopenia) कहा जाता है।

मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने के लिए पर्याप्त प्रोटीन का सेवन जरूरी है। प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत, मांसपेशियों के निर्माण और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर सलीम के मुताबिक, डाइट में प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना मसल्स की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।

काला चना: सस्ता और प्रोटीन से भरपूर विकल्प

काला चना प्रोटीन के साथ आयरन का भी अच्छा स्रोत माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 100 ग्राम काले चने में करीब 22 ग्राम प्रोटीन हो सकता है।

इसे डाइट में शामिल करने के लिए रात में करीब 50 ग्राम चने को पानी में भिगोकर रखा जा सकता है। सुबह इन्हें उबालकर खाया जा सकता है। हालांकि, जिन लोगों को चना खाने से गैस या पाचन संबंधी परेशानी होती है, उन्हें मात्रा और सेवन के तरीके को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।

अंडा: प्रोटीन का आसान स्रोत

अंडे को प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसमें शरीर के लिए जरूरी कई अमीनो एसिड पाए जाते हैं, जो मांसपेशियों की मरम्मत और रखरखाव में भूमिका निभाते हैं।

जो लोग अंडा खाते हैं, उनके लिए इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। अंडे में मौजूद अन्य पोषक तत्व भी शरीर के लिए उपयोगी होते हैं।

मूंग दाल: पाचन के लिए भी हल्की

अगर किसी व्यक्ति को दालों में से ऐसी चीज चाहिए जो अपेक्षाकृत आसानी से पच सके, तो मूंग दाल अच्छा विकल्प हो सकती है। 100 ग्राम मूंग दाल में करीब 24 ग्राम प्रोटीन बताया जाता है।

गैस या पाचन संबंधी संवेदनशीलता वाले लोग चने की तुलना में मूंग दाल को आसानी से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की पाचन क्षमता अलग होती है।

पनीर: शाकाहारियों के लिए अच्छा विकल्प

शाकाहारी लोगों के लिए पनीर प्रोटीन का एक लोकप्रिय स्रोत है। इसमें प्रोटीन के साथ कैल्शियम समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।

कैल्शियम हड्डियों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि पर्याप्त प्रोटीन मांसपेशियों के रखरखाव में मदद करता है। इसलिए संतुलित मात्रा में पनीर को डाइट में शामिल किया जा सकता है।

सोयाबीन में भरपूर प्रोटीन

सोयाबीन प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 100 ग्राम सोयाबीन में करीब 36 ग्राम प्रोटीन पाया जा सकता है।

शाकाहारी और वेगन डाइट लेने वाले लोगों के लिए सोयाबीन प्रोटीन का उपयोगी स्रोत हो सकता है। इसे अलग-अलग तरीकों से भोजन में शामिल किया जा सकता है।

दही: प्रोटीन के साथ प्रोबायोटिक्स भी

दही में प्रोटीन के अलावा प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं, जो आंतों की सेहत के लिए उपयोगी हो सकते हैं। अच्छी पाचन प्रक्रिया शरीर में पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग में मदद करती है।

इसलिए दही को भी संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। बिना जरूरत ज्यादा चीनी मिलाए सादा दही लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

सिर्फ प्रोटीन ही काफी नहीं

मसल्स को मजबूत रखने के लिए केवल प्रोटीन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ रेजिस्टेंस एक्सरसाइज या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार भी महत्वपूर्ण हैं।

अगर लगातार कमजोरी, मांसपेशियों में कमी, चलने-फिरने में परेशानी या पकड़ कमजोर होने जैसी समस्या महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर बुजुर्गों या किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

Disclaimer : यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसमें बताए गए खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, एलर्जी, पाचन क्षमता और अन्य जरूरतों को ध्यान में रखें। किसी बीमारी, कमजोरी या मांसपेशियों से जुड़ी समस्या होने पर डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लें। यह लेख किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं है।