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सुबह तकिए पर दिखती है लार तो न करें नजरअंदाज, शरीर में इन 6 बदलावों का हो सकता है संकेत

 
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क्या सुबह उठने के बाद आपको अक्सर अपना तकिया गीला मिलता है? अगर हां, तो इसकी वजह सोते समय मुंह से लार का बाहर निकलना हो सकती है। आमतौर पर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं और इस बारे में बात करने में भी झिझकते हैं। मेडिकल भाषा में अत्यधिक लार आने या लार के मुंह से बाहर निकलने की समस्या को सियालोरिया (Sialorrhea) कहा जाता है।

छोटे बच्चों में लार टपकना काफी सामान्य है, खासकर दांत निकलने के समय। लेकिन अगर किसी वयस्क में यह समस्या अचानक शुरू हो गई है या लगातार बढ़ रही है, तो इसके पीछे कोई अन्य कारण भी हो सकता है।

आखिर क्यों टपकती है सोते समय लार?

लार टपकने की समस्या सिर्फ मुंह में ज्यादा लार बनने की वजह से नहीं होती। कई बार लार सामान्य मात्रा में बनने के बावजूद उसे निगलने में परेशानी होने या मुंह की मांसपेशियों पर पर्याप्त नियंत्रण न होने के कारण भी लार बाहर निकल सकती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।

उम्र और खानपान: छोटे बच्चों में यह समस्या आम है। खासकर दांत निकलने के दौरान लार अधिक बन सकती है। वहीं बहुत खट्टी या मीठी चीजें खाने से भी कुछ लोगों में लार का उत्पादन बढ़ सकता है।

नसों और दिमाग से जुड़ी समस्याएं: कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियों, जैसे पार्किंसंस डिजीज, स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी, मल्टीपल स्केलेरोसिस और ALS में निगलने या मुंह की मांसपेशियों के नियंत्रण में परेशानी के कारण लार टपक सकती है।

गले और सांस से जुड़ी समस्याएं: गले का संक्रमण, टॉन्सिल की समस्या, साइनस, एलर्जी और नाक बंद रहने जैसी स्थितियों में व्यक्ति मुंह से सांस लेने लगता है, जिससे सोते समय लार बाहर निकल सकती है।

एसिड रिफ्लक्स: कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स की समस्या के साथ भी लार बढ़ने की शिकायत हो सकती है।

दवाइयां और अन्य कारण: कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट, मुंह या गले से जुड़ी समस्याएं और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी अत्यधिक लार आने की वजह बन सकती हैं।

सोते समय ही ज्यादा क्यों टपकती है लार?

इसका संबंध आपकी सोने की स्थिति से भी हो सकता है। करवट या पेट के बल सोने पर मुंह खुला रहने की स्थिति में लार आसानी से बाहर निकल सकती है। वहीं पीठ के बल सोने पर लार के बाहर निकलने की संभावना कुछ लोगों में कम हो सकती है।

अगर कोई व्यक्ति हमेशा करवट लेकर सोता रहा है लेकिन अचानक से लार टपकने की समस्या शुरू हो गई है, तो एलर्जी, नाक बंद होना, एसिड रिफ्लक्स या निगलने से जुड़ी किसी समस्या जैसे कारणों पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है।

क्या ज्यादा लार टपकना नुकसानदायक हो सकता है?

कभी-कभार सोते समय लार निकल जाना आम बात है और अकेले इस आधार पर किसी बीमारी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। लेकिन अगर समस्या लगातार बनी रहती है, तो इससे मुंह के आसपास की त्वचा में जलन, लालिमा या घाव हो सकते हैं।

कुछ लोगों में निगलने की समस्या के कारण लार सांस की नली में जाने का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए यदि लार टपकने के साथ निगलने में परेशानी, बार-बार खांसी, सांस लेने में दिक्कत, आवाज में बदलाव या अन्य नए लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

इससे राहत पाने के लिए क्या करें?

अगर समस्या हल्की है, तो सबसे पहले इसके संभावित कारण को समझना जरूरी है। नाक बंद रहती है या एलर्जी है तो उसका उचित इलाज मददगार हो सकता है। बहुत खट्टी या मीठी चीजें खाने के बाद समस्या बढ़ती है तो उन्हें सीमित करके भी देखा जा सकता है।

बच्चों में दांत निकलने के दौरान लार आना सामान्य हो सकता है। उन्हें उम्र के अनुसार सुरक्षित और ठंडी चबाने वाली चीजें दी जा सकती हैं, लेकिन बहुत ठंडी चीजें या कोई भी घरेलू उपाय अपनाने से पहले बच्चे की उम्र का ध्यान रखना जरूरी है।

अगर समस्या ज्यादा है, तो डॉक्टर स्थिति के अनुसार लार कम करने वाली दवाएं, निगलने और मुंह की मांसपेशियों से जुड़ी थेरेपी या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में लार ग्रंथियों में बोटुलिनम टॉक्सिन (Botox) इंजेक्शन का इस्तेमाल भी किया जाता है।

बहुत गंभीर और लगातार बनी रहने वाली समस्या में विशेषज्ञ अन्य उपचार विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। सर्जरी या रेडिएशन जैसे उपचार सामान्य उपाय नहीं हैं और इन्हें केवल चुनिंदा गंभीर मामलों में विशेषज्ञ की सलाह पर ही इस्तेमाल किया जाता है।

कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर सोते समय कभी-कभार लार टपकती है तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन समस्या अचानक शुरू हुई हो, लगातार बढ़ रही हो, निगलने में परेशानी हो, खाना खाते समय बार-बार खांसी आती हो या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही हो, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।

लार टपकना अपने आप में हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन इसके पीछे की वजह समझना जरूरी है। सही कारण पता चलने के बाद ही उचित इलाज किया जा सकता ह