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डेंगू पर भारत की बड़ी जीत! पहली वैक्सीन 'क्यूडेंगा' को मंजूरी, 80% तक संक्रमण रोकने का दावा
 

 
 डेंगू पर भारत की बड़ी जीत! पहली वैक्सीन 'क्यूडेंगा' को मंजूरी, 80% तक संक्रमण रोकने का दावा
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नई दिल्ली। डेंगू से जूझ रहे भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की मंजूरी के बाद देश को डेंगू के खिलाफ पहली स्वीकृत वैक्सीन 'क्यूडेंगा' (Qdenga) मिल गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैक्सीन डेंगू संक्रमण, गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मौत के खतरे को काफी हद तक कम करने में प्रभावी साबित हुई है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि सरकार इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में कब शामिल करती है।

लखनऊ स्थित सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (CBMR) के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक धवन के अनुसार, भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए यह पहली स्वीकृत वैक्सीन है। सात वर्षों तक इसके प्रभाव और सुरक्षा की निगरानी के बाद सामने आए आंकड़ों में यह वैक्सीन डेंगू संक्रमण को रोकने में करीब 80 प्रतिशत तक प्रभावी पाई गई है।

दो डोज से बनेगी सुरक्षा कवच

क्यूडेंगा वैक्सीन 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए स्वीकृत की गई है। इसकी 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकें तीन महीने के अंतराल पर दी जाएंगी। यह डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित करती है।

संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने का खतरा घटेगा

अंतरराष्ट्रीय क्लीनिकल ट्रायल और शोध के अनुसार, दूसरी डोज के 12 महीने बाद यह वैक्सीन डेंगू संक्रमण रोकने में लगभग 80 प्रतिशत प्रभावी रही। वहीं, 18 महीने बाद गंभीर मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 90 प्रतिशत तक कम पाया गया। विशेषज्ञों ने सात वर्षों तक इसके प्रभाव की निगरानी भी की है।

टीका लगवाने से पहले जांच की जरूरत नहीं

डॉ. आलोक धवन ने बताया कि क्यूडेंगा एक लाइव एटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट वैक्सीन है, जिसमें डेंगू वायरस के चारों प्रकार के कमजोर रूप शामिल हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि टीका लगवाने से पहले यह जांच कराने की आवश्यकता नहीं होती कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं।

पहली वैक्सीन से अधिक सुविधाजनक

इससे पहले दुनिया की पहली डेंगू वैक्सीन डेंगवैक्सिया उपलब्ध थी, लेकिन उसे लगाने से पहले ब्लड टेस्ट कराना अनिवार्य था। क्यूडेंगा इस बाधा को समाप्त करती है, जिससे बड़े स्तर पर टीकाकरण आसान हो सकेगा।

कीमत और उत्पादन

जापान की टाकेडा कंपनी द्वारा विकसित इस वैक्सीन का आयात टाकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया करेगी। शुरुआती अनुमान के अनुसार इसकी एक डोज की कीमत 4,000 से 5,000 रुपये के बीच हो सकती है। वहीं, 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई के साथ मिलकर हर साल करीब 5 करोड़ डोज तैयार करने की योजना बनाई गई है।

42 देशों में मिल चुकी है मंजूरी

क्यूडेंगा को यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड सहित 42 देशों में मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई "जादुई समाधान" नहीं है। डेंगू पर स्थायी नियंत्रण के लिए मच्छरों के प्रजनन को रोकना, पानी जमा न होने देना और स्वच्छता बनाए रखना अब भी बेहद जरूरी है।

यूपी में पांच साल में एक लाख से ज्यादा डेंगू मरीज

उत्तर प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान एक लाख से अधिक लोग डेंगू से संक्रमित हो चुके हैं। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश में डेंगू के मामलों का विवरण इस प्रकार है—

वर्ष                                                                                                   कुल मामले                           
2021                                                  29,750
2022                                                  9,821
2023                                                  35,402
2024                                                  15,868
2025                                                   9,206