केरल में मिला निपाह वायरस का नया केस, जानिए कैसे फैलता है संक्रमण और कैसे करें बचाव?
Jun 12, 2026, 19:18 IST
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केरल में एक बार फिर निपाह वायरस का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। कोझिकोड जिले में 45 वर्षीय एक व्यक्ति में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमित मरीज का इलाज कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है, जबकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी शुरू कर दी है।
77 लोगों की निगरानी में स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में कुल 77 लोग आए हैं। राहत की बात यह है कि अब तक इनमें से किसी में भी निपाह वायरस के लक्षण नहीं पाए गए हैं। संपर्क में आए लोगों में 14 परिवार के सदस्य, 5 दोस्त और सहकर्मी तथा 58 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। अधिकारियों ने इनमें से 15 लोगों को उच्च जोखिम (हाई रिस्क) श्रेणी में रखा है और उनकी विशेष निगरानी की जा रही है।
क्या है निपाह वायरस?
निपाह वायरस एक जूनोटिक (पशुओं से इंसानों में फैलने वाला) वायरस है। इसका प्रमुख स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं। यह वायरस पहली बार वर्ष 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में सामने आया था। इसके बाद भारत, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में समय-समय पर इसके संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं।
कैसे फैलता है संक्रमण?
विशेषज्ञों के अनुसार निपाह वायरस कई माध्यमों से फैल सकता है। संक्रमित चमगादड़ों की लार, मूत्र या मल से दूषित फलों का सेवन करने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ऐसा कच्चा खजूर का रस पीना, जो चमगादड़ों के संपर्क में आया हो, भी संक्रमण का कारण बन सकता है।
वायरस संक्रमित जानवरों, विशेष रूप से सूअरों, के संपर्क में आने से भी फैल सकता है। वहीं संक्रमित व्यक्ति की लार, खून या शरीर से निकलने वाले अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आने पर भी यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है।
क्यों माना जाता है खतरनाक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि निपाह वायरस गंभीर संक्रमण पैदा कर सकता है और कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होता है। संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। यही वजह है कि किसी भी मामले की पुष्टि होते ही संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी शुरू कर दी जाती है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
77 लोगों की निगरानी में स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में कुल 77 लोग आए हैं। राहत की बात यह है कि अब तक इनमें से किसी में भी निपाह वायरस के लक्षण नहीं पाए गए हैं। संपर्क में आए लोगों में 14 परिवार के सदस्य, 5 दोस्त और सहकर्मी तथा 58 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। अधिकारियों ने इनमें से 15 लोगों को उच्च जोखिम (हाई रिस्क) श्रेणी में रखा है और उनकी विशेष निगरानी की जा रही है।
क्या है निपाह वायरस?
निपाह वायरस एक जूनोटिक (पशुओं से इंसानों में फैलने वाला) वायरस है। इसका प्रमुख स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं। यह वायरस पहली बार वर्ष 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में सामने आया था। इसके बाद भारत, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में समय-समय पर इसके संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं।
कैसे फैलता है संक्रमण?
विशेषज्ञों के अनुसार निपाह वायरस कई माध्यमों से फैल सकता है। संक्रमित चमगादड़ों की लार, मूत्र या मल से दूषित फलों का सेवन करने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ऐसा कच्चा खजूर का रस पीना, जो चमगादड़ों के संपर्क में आया हो, भी संक्रमण का कारण बन सकता है।
वायरस संक्रमित जानवरों, विशेष रूप से सूअरों, के संपर्क में आने से भी फैल सकता है। वहीं संक्रमित व्यक्ति की लार, खून या शरीर से निकलने वाले अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आने पर भी यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है।
क्यों माना जाता है खतरनाक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि निपाह वायरस गंभीर संक्रमण पैदा कर सकता है और कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होता है। संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। यही वजह है कि किसी भी मामले की पुष्टि होते ही संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी शुरू कर दी जाती है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
