किडनी ट्रांसप्लांट में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए NOTTO का बड़ा फैसला, अस्पतालों को नतीजे सार्वजनिक करने के निर्देश
नई दिल्ली। देश में किडनी ट्रांसप्लांट व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए National Organ and Tissue Transplant Organization (NOTTO) ने बड़ा कदम उठाया है। अब देश के सभी ट्रांसप्लांट सेंटरों को मरीजों के जीवित रहने की दर, मृत्यु दर, ग्राफ्ट फेलियर और लंबे समय के परिणामों से जुड़ा डेटा अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा।
यह निर्देश भाजपा सांसद Captain Brijesh Chauhta द्वारा ट्रांसप्लांट नतीजों में पारदर्शिता की कमी उठाए जाने के बाद जारी किया गया है। NOTTO के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि हर अस्पताल नियमित रूप से अपने ट्रांसप्लांट परिणाम राष्ट्रीय रजिस्ट्री में दर्ज करे और वेबसाइट पर प्रमुखता से प्रदर्शित करे।
निर्देशों के अनुसार अस्पतालों को ट्रांसप्लांट के बाद डिस्चार्ज के समय, 6 महीने, 1 वर्ष, 3 वर्ष और 5 वर्ष पर मरीजों की स्थिति, मृत्यु, ग्राफ्ट फेलियर और फॉलो-अप डेटा साझा करना अनिवार्य होगा। अभी देश में 824 ट्रांसप्लांट सेंटर इस रजिस्ट्री से जुड़े हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से मरीजों को अस्पताल चुनने में बेहतर जानकारी मिलेगी और सिस्टम में जवाबदेही बढ़ेगी। हालांकि डॉक्टरों ने यह भी कहा है कि इन आंकड़ों को मरीज की स्थिति और जोखिम कारकों के संदर्भ में ही समझना जरूरी है।
इस बीच एक पुराने मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 2012 के एक किडनी ऑपरेशन में गलती से स्वस्थ किडनी निकालने के मामले में परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया था, जिसने मेडिकल लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
