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छोटी उम्र में बच्चों की पियर्सिंग पड़ सकती है भारी! डॉक्टर से जानें कब और कैसे कराएं

 
छोटी उम्र
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भारत में बच्चों के कान छिदवाने की परंपरा काफी पुरानी है। कई परिवारों में नाक छिदवाने की परंपरा भी निभाई जाती है। कुछ लोग बच्चे के जन्म के कुछ महीने बाद ही कान छिदवा देते हैं, तो कुछ परिवार बच्चे के थोड़ा बड़ा होने का इंतजार करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों के कान या नाक छिदवाने के लिए सही समय क्या होना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
इस बारे में फिजिशियन डॉ. आर. के. चतुर्वेदी ने कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं।

बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए तो बेहतर

डॉ. चतुर्वेदी के मुताबिक, बहुत छोटे बच्चे के कान या नाक छिदवाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। बेहतर है कि पियर्सिंग उस समय कराई जाए, जब बच्चा थोड़ा समझदार हो और ईयररिंग या नोज पिन को संभाल सके।

छोटे बच्चे अक्सर कान की बाली या नोज पिन को हाथ से पकड़कर खींच देते हैं। इससे चोट लगने, खून निकलने या घाव होने का खतरा रहता है। इसलिए बच्चे की उम्र के साथ उसकी आदतों और समझ को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

कम उम्र में पियर्सिंग से क्या खतरा?

डॉक्टर के अनुसार, पियर्सिंग के दौरान सावधानी नहीं बरती गई तो नस को चोट पहुंचने जैसी समस्या हो सकती है। इसके अलावा, छोटे बच्चे दर्द और पियर्सिंग की प्रक्रिया से डर सकते हैं। अचानक होने वाला तेज दर्द बच्चे के मन में डर पैदा कर सकता है। इसलिए केवल परंपरा निभाने के लिए बहुत कम उम्र में पियर्सिंग कराने के बजाय बच्चे की स्थिति और सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

मानसून में पियर्सिंग से क्यों बचें?

डॉ. चतुर्वेदी के मुताबिक, बारिश के मौसम में कान या नाक छिदवाने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। मानसून में वातावरण में नमी अधिक रहती है, जिससे पियर्सिंग के बाद बने घाव में संक्रमण या फंगल इंफेक्शन की आशंका बढ़ सकती है।
ऐसे में अगर पियर्सिंग जरूरी न हो तो बारिश का मौसम गुजरने के बाद इसे कराने पर विचार किया जा सकता है।

पियर्सिंग से पहले इन बातों का रखें ध्यान

बच्चे के कान या नाक छिदवाने से पहले साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- इस्तेमाल होने वाली सुई या उपकरण नया और स्टरलाइज्ड होना चाहिए।
- पियर्सिंग गन का इस्तेमाल हो तो उसकी स्वच्छता और गुणवत्ता सुनिश्चित करें।
- किसी भी तरह के इस्तेमाल किए हुए या संदिग्ध उपकरण से पियर्सिंग न कराएं।
- पियर्सिंग के बाद उस जगह की नियमित सफाई रखें।
- लालिमा, सूजन, लगातार दर्द, पस या बुखार जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लें।

डॉक्टर की सलाह क्या है?

डॉ. आर. के. चतुर्वेदी का कहना है कि बच्चों के कान या नाक छिदवाने में जल्दबाजी से बचना चाहिए। जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए, चीजों को समझने लगे और ज्वेलरी को बार-बार खींचने की संभावना कम हो, तब पियर्सिंग कराने पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि, पियर्सिंग की कोई एक सार्वभौमिक “सही उम्र” नहीं है। बच्चे की उम्र, स्वास्थ्य, स्थानीय परंपरा और प्रक्रिया की स्वच्छता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी छोटे बच्चे की पियर्सिंग कराने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।