छींक आते ही रोक लेते हैं? एक छोटी सी गलती और फट सकते हैं आपके कान के पर्दे
छींक शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है, लेकिन इसे रोकना हमेशा सुरक्षित नहीं माना जाता। नाक और मुंह बंद करके छींक दबाने से शरीर के भीतर अचानक दबाव बढ़ सकता है और दुर्लभ मामलों में कान या सांस की नलियों को नुकसान पहुंच सकता है। जानिए छींक आने पर क्या करना बेहतर है।
छींक आना शरीर की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है, जिसका काम नाक और सांस की नली में मौजूद धूल, एलर्जी पैदा करने वाले कण या दूसरे irritants को बाहर निकालना है। लेकिन कई लोग सार्वजनिक जगह पर छींक आने पर उसे रोकने के लिए नाक और मुंह बंद कर लेते हैं। ऐसा करना हमेशा सुरक्षित नहीं माना जाता। छींक को जबरन दबाने से शरीर के भीतर अचानक दबाव बढ़ सकता है और दुर्लभ मामलों में कान या सांस की नलियों को नुकसान पहुंच सकता है।
छींक आती क्यों है?
छींक दरअसल शरीर का एक रिफ्लेक्स है। जब नाक की अंदरूनी सतह पर धूल, परागकण, धुआं या कोई अन्य पदार्थ जलन पैदा करता है, तो नर्वस सिस्टम दिमाग को इसका संकेत भेजता है। इसके बाद फेफड़ों और सांस से जुड़े मांसपेशियों की मदद से हवा तेजी से बाहर निकलती है।
इस प्रक्रिया में नाक और मुंह से हवा के साथ उन कणों और म्यूकस को बाहर निकालने में मदद मिलती है, जो नाक में परेशानी पैदा कर रहे होते हैं।
छींक रोकने पर क्या होता है?
छींक को रोकने के लिए अगर कोई नाक और मुंह को पूरी तरह बंद कर लेता है तो बाहर निकलने वाली हवा का रास्ता अचानक रुक जाता है। इससे छींक के दौरान बनने वाला दबाव शरीर के अंदर ही बढ़ सकता है।
इसी वजह से विशेषज्ञ आम तौर पर छींक को पूरी तरह दबाने के बजाय उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने की सलाह देते हैं। कुछ चिकित्सा रिपोर्टों में जबरन छींक रोकने को सांस की नली और कान से जुड़ी चोटों जैसे दुर्लभ मामलों से जोड़ा गया है।
कान के पर्दे को भी हो सकता है नुकसान
छींक रोकने के दौरान बनने वाला अचानक दबाव कान और उससे जुड़ी संरचनाओं तक भी पहुंच सकता है। इसी वजह से छींक को नाक दबाकर या मुंह पूरी तरह बंद करके रोकना सही तरीका नहीं माना जाता।
हालांकि, गंभीर चोट जैसी स्थिति सामान्य नहीं है और ऐसे मामले दुर्लभ हैं। इसलिए इसे लेकर अनावश्यक डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन छींक को जबरन रोकने की आदत से बचना बेहतर है।
छींक आए तो क्या करें?
अगर सार्वजनिक जगह पर छींक आती है तो उसे रोकने के बजाय मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी के अंदरूनी हिस्से से ढककर छींकना बेहतर है। इससे छींक के साथ निकलने वाली बूंदों और संक्रमण फैलाने वाले कणों का प्रसार कम करने में मदद मिलती है। हाथ से मुंह ढकने पर बाद में हाथों के जरिए सतहों और दूसरे लोगों तक संक्रमण पहुंचने का जोखिम बढ़ सकता है।
बार-बार छींक आ रही है तो वजह भी समझें
कभी-कभार छींक आना सामान्य है, लेकिन अगर लगातार छींक आती है, नाक बंद रहती है, आंखों में खुजली या पानी आता है अथवा दूसरे लक्षण भी बने रहते हैं तो इसकी वजह एलर्जी, संक्रमण या नाक से जुड़ी दूसरी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी या लगातार बने रहने वाले लक्षण के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
