भारत में सुपरबग संकट: ICMR की रिपोर्ट ने दी "साइलेंट महामारी" की चौंकाने वाली चेतावनी
नई दिल्ली। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने अपनी नवीनतम एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) सर्विलांस रिपोर्ट जारी कर देश में बढ़ते सुपरबग खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में देशभर के अस्पतालों से एकत्र 99,027 कल्चर-पॉजिटिव सैंपल में एंटीबायोटिक प्रतिरोध का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा है। खासकर ICU में Acinetobacter baumannii बैक्टीरिया 91% तक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी पाया गया है, जिसे WHO ने अपनी क्रिटिकल प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है।
मुख्य निष्कर्ष:
- ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया (GNB) सबसे अधिक संक्रमण के लिए जिम्मेदार, ये तेजी से रेसिस्टेंट हो रहे हैं।
- ICU में हर चौथा गंभीर संक्रमण Acinetobacter baumannii से, 91% रेसिस्टेंस।
- टाइफाइड के 95% मामले फ्लोरोक्विनोलोन दवाओं के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी।
- OPD और सामान्य वार्डों में भी E. coli, Klebsiella pneumoniae और Pseudomonas aeruginosa का भारी प्रतिरोध।
- डॉक्टरों को पहली व दूसरी लाइन की दवाएं छोड़कर सीधे लास्ट-लाइन एंटीबायोटिक्स (जैसे कोलिस्टिन, कार्बापेनेम) इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं।
जीन स्तर पर सुपरबग नेटवर्क का विस्तार
ICMR की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कामना वालिया ने बताया कि NDM, OXA-48, TEM जैसे हाई-रिस्क रेसिस्टेंस जीन बैक्टीरिया के बीच तेजी से फैल रहे हैं। ये जीन एक बैक्टीरिया से दूसरे में और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में आसानी से ट्रांसफर हो जाते हैं। यदि इन्हें अभी नहीं रोका गया तो ये समुदाय स्तर पर फैल जाएंगे, जहां इनका नियंत्रण लगभग असंभव हो जाएगा।
तत्काल कार्रवाई जरूरी
डॉ. वालिया ने चेताया कि एंटीबायोटिक का अंधाधुंध उपयोग, अस्पतालों में कमजोर इंफेक्शन कंट्रोल और निगरानी की कमी ने AMR को राष्ट्रीय संकट बना दिया है। उन्होंने निम्नलिखित कदमों को तुरंत लागू करने की सिफारिश की:
- राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत एंटीबायोटिक नीति लागू करना
- सभी अस्पतालों में नियमित AMR ऑडिट
- डॉक्टरों-फार्मासिस्टों के लिए सख्त प्रिस्क्रिप्शन दिशा-निर्देश
- जनजागरूकता अभियान ताकि लोग बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक न लें
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी नहीं चेते तो आने वाले कुछ वर्षों में सामान्य संक्रमण भी जानलेवा हो जाएंगे और सर्जरी, कीमोथेरेपी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसे इलाज असंभव हो सकते हैं। ICMR ने इसे “साइलेंट महामारी” करार देते हुए सभी राज्यों से तुरंत एक्शन प्लान बनाने को कहा है।
