World Heart Day 2026 : युवाओं में क्यों बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा? डॉक्टरों ने बताई बड़ी वजह
World Heart Day 2026 : बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल और खानपान में आए बदलाव के कारण युवाओं में हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है। शारीरिक गतिविधियां कम होने और योग-व्यायाम से दूरी के बीच कम उम्र में हार्ट अटैक के मामलों को लेकर डॉक्टरों ने लोगों को जीवनशैली सुधारने की सलाह दी है।
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर मंडलीय चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. बृजेश ने कहा कि आज बच्चे और युवा आउटडोर खेलों से दूर होते जा रहे हैं। गिल्ली-डंडा और क्रिकेट जैसे खेलों की जगह मोबाइल गेम और डिजिटल मीडिया ने ले ली है। लंबे समय तक मोबाइल और स्क्रीन पर रहने से शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हैं, जिसका असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
पैक्ड और फास्ट फूड से भी बढ़ी चिंता
डा. बृजेश ने कहा कि खानपान में भी पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। पैक्ड फूड, चिप्स, फास्ट फूड और अन्य अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ा है। उन्होंने अल्कोहल और नॉनवेज के अत्यधिक सेवन को भी नियंत्रित करने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि पहले घरों में मल्टीग्रेन आटे और पारंपरिक भोजन को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब खानपान की पुरानी स्वस्थ आदतें कम होती जा रही हैं। इसके साथ तनाव और शारीरिक श्रम की कमी हृदय स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रही है।
मोबाइल का सीमित इस्तेमाल और योग की सलाह
डॉक्टर ने लोगों से जीवनशैली में बदलाव करने की अपील की। उन्होंने नियमित योग और व्यायाम करने, तनाव कम करने, मोबाइल का सीमित इस्तेमाल करने और पारंपरिक पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उनके मुताबिक, रोजमर्रा की आदतों में सुधार हृदय को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सरकारी अस्पतालों में कई उन्नत जांच सुविधाओं की कमी
वाराणसी के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में हृदय रोगों की जांच के लिए कुछ सुविधाएं उपलब्ध हैं। सीएचसी, पीएचसी और जिलास्तरीय अस्पतालों में लिपिड प्रोफाइल, ट्रोपोनिन टेस्ट और एचएस-सीआरपी जैसी जांचें की जा रही हैं। हालांकि, इकोकार्डियोग्राफी, ट्रेडमिल टेस्ट, सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी और हार्ट एमआरआई जैसी उन्नत जांच सुविधाएं सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हैं।
दीनदयाल अस्पताल में एमआरआई मशीन लगाने का प्रस्ताव भी लंबे समय से लंबित बताया गया है। उन्नत जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ने से हृदय रोगों की समय पर पहचान और उपचार में मदद मिल सकती है।
100 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट तैयार हो रहा
हृदयघात परियोजना के तहत पांडेयपुर स्थित मानसिक चिकित्सालय के पीछे 100 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट बनाया जा रहा है। इसके तैयार होने के बाद वाराणसी समेत पूर्वांचल के मरीजों को गंभीर हृदय संबंधी मामलों में इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
हार्ट अटैक की स्थिति में इंजेक्शन से इलाज
सीएमओ वाराणसी डा. एनपी सिंह ने बताया कि हृदयाघात से बचाव के लिए स्टेमी केयर प्रोजेक्ट के तहत सीएचसी, पीएचसी और जिलास्तरीय चिकित्सालयों में मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि करीब 40 हजार रुपये लागत वाली टेनेक्टेप्लस सुई का इस्तेमाल कर जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार दिया जा रहा है।
डा. सिंह के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य हार्ट अटैक की स्थिति में मरीज को शुरुआती स्तर पर ही जरूरी उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि उसे आगे के इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने के दौरान समय का नुकसान न हो।
