आवाज में बदलाव सिर्फ गले की बीमारी नहीं? डिमेंशिया के खतरे से जुड़ा मिला कनेक्शन, 8.33 लाख लोगों पर हुई रिसर्च
Dementia Symptoms: आवाज में लगातार बदलाव को केवल गले की सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर बोलने या गाने के दौरान दर्द, परेशानी या आवाज की स्पष्टता में बदलाव लगातार बना हुआ है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। अमेरिका में हुए एक नए शोध में आवाज से जुड़ी समस्याओं और डिमेंशिया के बढ़ते खतरे के बीच संबंध सामने आया है।
अमेरिका की ड्रेक्सेल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने 50 साल से अधिक उम्र के 8.33 लाख से ज्यादा लोगों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के रिकॉर्ड का अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि कुछ मामलों में आवाज से जुड़ी समस्या का डिमेंशिया के खतरे से संबंध, केवल सुनने की क्षमता में कमी की तुलना में ज्यादा मजबूत हो सकता है।
आवाज की समस्या वालों में 58 फीसदी ज्यादा खतरा
शोध के मुताबिक, जिन लोगों को आवाज से जुड़ी समस्या थी, लेकिन सुनने में कोई परेशानी नहीं थी, उनमें ऐसी समस्या नहीं रखने वाले लोगों की तुलना में डिमेंशिया का खतरा 58 फीसदी ज्यादा पाया गया।
वहीं, केवल सुनने की क्षमता में कमी वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा करीब 27 फीसदी अधिक था। शोध में सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों में देखा गया, जिन्हें आवाज और सुनने, दोनों से जुड़ी समस्याएं थीं।
हालांकि, इन आंकड़ों का यह मतलब नहीं है कि आवाज में बदलाव होने का मतलब डिमेंशिया होना है। शोध आवाज संबंधी समस्या और मानसिक क्षमता में गिरावट के बीच संभावित संबंध की ओर संकेत करता है।
आवाज और दिमाग के बीच क्या संबंध है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, आवाज और मानसिक क्षमता के बीच संबंध जैविक रूप से संभव है। बोलने की प्रक्रिया में दिमाग के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं। व्यक्ति को शब्दों को समझने, सही शब्द चुनने, बोलने और आवाज को नियंत्रित करने के लिए इन हिस्सों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत होती है।
ऐसे में बोलने के तरीके या आवाज में लगातार होने वाला बदलाव कुछ मामलों में दिमाग से जुड़ी शुरुआती समस्या का संकेत हो सकता है। हालांकि, आवाज में बदलाव के पीछे सर्दी-जुकाम, गले की समस्या या अन्य सामान्य कारण भी हो सकते हैं।
भारत में भी बढ़ रही डिमेंशिया की चुनौती
बढ़ती उम्र की आबादी के साथ भारत में भी डिमेंशिया एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। मौजूदा अनुमान के मुताबिक देश में करीब 88 लाख लोग डिमेंशिया से प्रभावित हैं। अनुमान है कि यह संख्या 2036 तक करीब 1.69 करोड़ तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिमेंशिया के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए केवल इलाज ही नहीं, बल्कि मरीजों की बेहतर देखभाल और समय रहते समस्या की पहचान पर भी ध्यान देना जरूरी है।
आवाज में ये बदलाव दिखें तो रहें सतर्क
अगर आवाज से जुड़ी परेशानी लगातार बनी हुई है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर ये लक्षण ध्यान देने लायक हैं:
- आवाज की पिच या उतार-चढ़ाव में लगातार बदलाव
- बोलने की स्पष्टता कम होना
- आवाज का अचानक बहुत धीमा या तेज हो जाना
- बोलते या गाते समय दर्द या परेशानी महसूस होना
आवाज में बदलाव हो तो डॉक्टर से लें सलाह
आवाज में बदलाव हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। सर्दी-जुकाम या गले से जुड़ी सामान्य समस्याओं के कारण भी आवाज बदल सकती है। लेकिन अगर परेशानी लगातार बनी रहती है या बोलने के तरीके में असामान्य बदलाव महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
जरूरत पड़ने पर चिकित्सक आवाज की जांच के लिए संबंधित विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं। समय रहते लक्षणों की जांच कराने से किसी भी संभावित समस्या की पहचान और उचित उपचार में मदद मिल सकती है।
