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108 घोड़े, शौर्य यात्रा और ड्रोन शो- सोमनाथ में दिखा भारत का स्वाभिमान, PM मोदी भी रहे मौजूद

 
108 घोड़े, शौर्य यात्रा और ड्रोन शो- सोमनाथ में दिखा भारत का स्वाभिमान, PM मोदी भी रहे मौजूद
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New Delhi : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित पावन सोमनाथ मंदिर में आयोजित ‘शौर्य यात्रा’ में शामिल होकर सदियों पहले मंदिर की रक्षा में प्राण न्यौछावर करने वाले वीर योद्धाओं को नमन किया। यह यात्रा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत निकाली गई, जिसमें 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकाली गई। प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ एक विशेष रूप से सजाए गए वाहन पर सवार होकर करीब एक किलोमीटर लंबे मार्ग पर यात्रा की। रास्ते भर दोनों ओर हजारों श्रद्धालु पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ उनका स्वागत करते रहे।

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शौर्य यात्रा और 108 घोड़ों का प्रतीक

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत निकाली गई यह शौर्य यात्रा उन वीर योद्धाओं के सम्मान में थी, जिन्होंने महमूद गजनवी के आक्रमणों के समय सोमनाथ मंदिर की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी थी। 108 घोड़े भारतीय परंपरा में वीरता, त्याग और बलिदान का प्रतीक माने जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और कहा कि सोमनाथ की यह गौरव गाथा आज भी भारत के हर नागरिक को प्रेरित करती है।

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रिकॉर्ड भीड़ और ड्रोन शो की झलक

शनिवार रात (10 जनवरी) से ही सोमनाथ मंदिर परिसर में रिकॉर्ड भीड़ उमड़ पड़ी थी। ठंड के बावजूद श्रद्धालु आधी रात तक मंदिर परिसर में डटे रहे। प्रधानमंत्री के आगमन के बाद जनसमूह अपने चरम पर पहुंच गया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु—बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे—इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने। शाम को प्रधानमंत्री मोदी ने ओंकार मंत्र का सामूहिक जाप किया, सोमनाथ बाबा के दर्शन किए और उसके बाद आयोजित भव्य ड्रोन शो को देखा।

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करीब 3,000 ड्रोन आकाश में एक साथ उड़ते हुए दिव्य आकृतियां बना रहे थे। ड्रोन से भगवान शिव, शिवलिंग, सोमनाथ मंदिर का त्रि-आयामी (3D) स्वरूप, और मंदिर के इतिहास में आए विध्वंस और पुनर्निर्माण के दृश्य प्रदर्शित किए गए। इसके बाद हुई ग्रीन आतिशबाजी ने समुद्र तट के आकाश को रोशनी से भर दिया। यह ड्रोन शो और आतिशबाजी केवल दृश्यात्मक कार्यक्रम नहीं थे, बल्कि सोमनाथ की उस कथा का प्रतीक थे, जो बार-बार टूटने के बाद भी और अधिक दृढ़ होकर खड़ी हुई।

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काशी से मथुरा तक सांस्कृतिक एकता का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व करोड़ों-करोड़ भारतीयों की शाश्वत आस्था, साधना और अटूट संकल्प का जीवंत प्रतिबिंब है। पवित्र श्री सोमनाथ मंदिर में इस महापर्व का सहभागी बनना मेरे जीवन का अविस्मरणीय और अमूल्य क्षण है।” उन्होंने आगे कहा कि गंगा से लेकर कावेरी तक हमारी साझी परंपरा भारत की एकता का प्रतीक है।

सोमनाथ शहर खुद उत्सव का हिस्सा बन गया। शंख सर्कल से वीर हमीरजी गोहिल सर्कल तक की मुख्य सड़क को फूलों, थीम आधारित सजावट और रोशनी से सजाया गया। त्रिशूल, ॐ और डमरू के आकार की रोशनी, फूलों से बने शिवलिंग और जगह-जगह लगे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के पोस्टर पूरे मार्ग को आध्यात्मिक वातावरण से भर रहे थे। शाम के समय कर्नाटक से आए लोकनृत्य कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

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सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व महमूद गजनवी के आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया। स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने मंदिर के पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया था। 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। आज भी मंदिर के मुख्य द्वार के सामने सरदार पटेल की प्रतिमा उस राष्ट्रीय संकल्प की याद दिलाती है।

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श्रद्धालुओं की भावनाएं

मुंबई से आई प्रीति कारेलिया ने कहा, “हम आज सोमनाथ मंदिर और अपने प्रधानमंत्री को देखने आए हैं। यह आयोजन मंदिर की परंपराओं और उसके अद्भुत धैर्य का उत्सव है। सजावट, आतिशबाजी और ड्रोन शो ने उस दिव्यता को और भी सशक्त बना दिया।” भावनगर से आए भारद्वाज गिरी ने वीर हमीरजी गोहिल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदू तीर्थों के गौरव की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की अटूट आस्था, संघर्ष और पुनरुत्थान की जीवंत गाथा है। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी और भव्य आयोजन ने इस पर्व को नया आयाम दिया। प्रकाश, परंपरा और तकनीक का यह अद्भुत संगम काशी से लेकर सोमनाथ तक भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करता है।