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बंगाल में 34 लाख वोटर्स नहीं कर सकेंगे मतदान, बोला SC- पहले ट्रिब्यूनल जाएं...

 
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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन मतदाताओं के नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाए गए हैं और जिनकी अपील अभी लंबित है, उन्हें फिलहाल मतदान का अधिकार नहीं दिया जाएगा।

अंतरिम राहत देने से कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि हटाए गए मतदाताओं को अस्थायी रूप से वोट डालने की अनुमति देना पूरी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

लाखों अपीलें लंबित, फिर भी नहीं मिलेगी अनुमति

सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस के नेता कल्याण बनर्जी ने बताया कि करीब 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं। वहीं अदालत में यह संख्या बढ़कर 34 लाख तक बताई गई। इसके बावजूद कोर्ट ने इन मतदाताओं को मतदान की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश का स्पष्ट रुख

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर ऐसे लोगों को वोट देने की अनुमति दी गई, तो चुनावी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होगी और वोटिंग सिस्टम को प्रभावित करना पड़ेगा। इसलिए यह संभव नहीं है।

पहले ट्रिब्यूनल जाएं याचिकाकर्ता

कोर्ट ने 13 याचिकाकर्ताओं की याचिका को “समय से पहले” बताते हुए कहा कि वे पहले अपीलीय ट्रिब्यूनल का रुख करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के मूल मुद्दे पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।

चुनाव आयोग की दलील

चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि 30 से 34 लाख अपीलें लंबित हैं और सभी मामलों की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार चल रही है। आयोग पहले ही वोटर लिस्ट को फ्रीज कर चुका है।

वोट का अधिकार अहम, लेकिन प्रक्रिया जरूरी

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि वोट देना सिर्फ संवैधानिक अधिकार ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र में भागीदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हर प्रक्रिया नियमों के तहत ही पूरी की जाएगी।

इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल में लाखों मतदाताओं के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि अब उन्हें मतदान से पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।