Movie prime

मिलावटखोरों की अब खैर नहीं, अब असली और एनालॉग पनीर की होगी साफ पहचान, FSSAI ला रहा नया लेबलिंग नियम

 
..
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

अगर आप बाजार से पनीर, दूध, मक्खन या मावा खरीदते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डेयरी उत्पादों की पहचान और लेबलिंग को लेकर नए नियमों का मसौदा तैयार किया है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को यह साफ-साफ बताना है कि वे जिस उत्पाद को खरीद रहे हैं, उसे बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है।

दरअसल, बाजार में कई ऐसे उत्पाद भी मिलते हैं जो देखने और इस्तेमाल करने में असली डेयरी प्रोडक्ट जैसे लगते हैं, लेकिन उन्हें तैयार करने में दूध या दूध से प्राप्त सामग्री के बजाय वनस्पति तेल, स्टार्च और दूसरी गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे उत्पादों को आमतौर पर एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट कहा जाता है।


‘पनीर’ नाम के इस्तेमाल पर लग सकती है रोक

FSSAI के प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, दूध से प्राप्त सामग्री के बजाय गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किए गए उत्पादों को उनकी वास्तविक पहचान के साथ बाजार में पेश करना होगा। ऐसे उत्पादों की पैकेजिंग, लेबल, नाम और मार्केटिंग में ‘पनीर’ जैसे डेयरी उत्पादों के नाम का इस्तेमाल प्रतिबंधित किया जा सकता है।

यानी अगर किसी उत्पाद में असली दूध से प्राप्त सामग्री के बजाय वनस्पति तेल, स्टार्च या अन्य विकल्पों का इस्तेमाल हुआ है, तो उसे इस तरह पेश नहीं किया जा सकेगा कि ग्राहक उसे असली डेयरी पनीर समझ बैठे।


ग्राहकों की उलझन होगी कम

इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को खरीदारी के समय सही जानकारी देना है। कई बार पनीर जैसा दिखने वाला उत्पाद असल में पारंपरिक दूध से तैयार पनीर नहीं होता। ऐसे में ग्राहक सिर्फ उसके रंग, आकार या पैकेजिंग को देखकर भ्रमित हो सकते हैं।

नए नियम लागू होने के बाद उत्पाद के लेबल पर उसकी वास्तविक सामग्री और पहचान को ज्यादा स्पष्ट तरीके से बताना जरूरी हो सकता है। इससे ग्राहक अपनी पसंद और जरूरत के मुताबिक उत्पाद का चुनाव कर सकेंगे।


पुराने उत्पाद भी आ सकते हैं दायरे में

प्रस्तावित नियमों का असर केवल बाजार में आने वाले नए उत्पादों पर ही नहीं पड़ सकता। पहले से लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के तहत बिक रहे कुछ उत्पाद भी इसके दायरे में आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और मार्केटिंग में जरूरी बदलाव करने पड़ सकते हैं।


60 दिनों में मांगे सुझाव

FSSAI ने इस मसौदे को लेकर हितधारकों, खाद्य उद्योग और आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। इस अवधि में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम जारी किए जा सकते हैं।

फिलहाल यह नियम प्रस्तावित मसौदे के स्तर पर हैं। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एनालॉग डेयरी उत्पादों की लेबलिंग और ‘पनीर’ जैसे नामों के इस्तेमाल को लेकर कौन-कौन से प्रावधान लागू होंगे।