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दिल्ली होटल अग्निकांड के बाद B&B स्कीम पर उठे सवाल, जानिए क्या है 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' योजना, क्या बदलेंगे नियम?

दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड के बाद Bed and Breakfast (B&B) स्कीम चर्चा में है। जानिए क्या है यह योजना, कब शुरू हुई, कैसे काम करती है और सरकार इसमें क्या बदलाव करने की तैयारी कर रही थी। 21 लोगों की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
 
Bed and Breakfast Scheme
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Bed and Breakfast Scheme: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया। 'फ्लरिश स्टे बीएंडबी' में लगी आग में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है। आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।

इस दर्दनाक हादसे के बाद जिस व्यवस्था की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है 'बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) स्कीम'। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग जिस परिसर में लगी वह इसी योजना के तहत संचालित किया जा रहा था। घटना के बाद अब इस स्कीम की सुरक्षा व्यवस्था, नियमों और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

क्या है Bed and Breakfast (B&B) स्कीम?

'बेड एंड ब्रेकफास्ट' या B&B स्कीम दिल्ली सरकार की एक ऐसी योजना है, जिसके तहत राजधानी के निवासी अपने घर के एक या एक से अधिक कमरों को पर्यटकों और यात्रियों के लिए किराए पर उपलब्ध करा सकते हैं।

इस योजना का उद्देश्य पर्यटकों को अपेक्षाकृत कम लागत पर बेहतर आवास उपलब्ध कराना और स्थानीय लोगों को अतिरिक्त आय का अवसर देना था।

हालांकि कोई भी व्यक्ति अपने घर को B&B सुविधा के रूप में संचालित तभी कर सकता है, जब वह सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और आवश्यक अनुमतियों को पूरा करे। इसके लिए पंजीकरण और विभिन्न सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होता है।

योजना के अंतर्गत मकान मालिक अपने घर के कुछ हिस्से को अतिथियों के लिए उपलब्ध कराते हैं और कई मामलों में उन्हें भोजन की सुविधा भी प्रदान की जाती है। इसी कारण इसे "बेड एंड ब्रेकफास्ट" नाम दिया गया।

2007 में हुई थी योजना की शुरुआत

दिल्ली में B&B स्कीम की शुरुआत वर्ष 2007 में की गई थी। उस समय राजधानी में कांग्रेस की सरकार थी और शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थीं। योजना का उद्देश्य दिल्ली आने वाले घरेलू और विदेशी पर्यटकों को होटल के विकल्प के रूप में सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराना था।

हालांकि शुरुआती वर्षों में इस योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी और यह लंबे समय तक सीमित दायरे में ही रही। धीरे-धीरे योजना ठंडे बस्ते में चली गई और इसका विस्तार नहीं हो पाया।

केजरीवाल सरकार में नहीं मिला ज्यादा विस्तार

राजधानी में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद भी इस योजना को लेकर कोई बड़ा विस्तार या व्यापक सुधार देखने को नहीं मिला।

योजना सीमित स्तर पर संचालित होती रही और अधिकांश लोग इसके बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं रख पाए। इसके चलते B&B मॉडल दिल्ली में उतनी लोकप्रियता हासिल नहीं कर सका जितनी अन्य देशों और महानगरों में देखने को मिलती है।

नई सरकार ने शुरू की थी पुनर्जीवित करने की तैयारी

दिल्ली में नई सरकार बनने के बाद B&B स्कीम को दोबारा सक्रिय करने और इसे पर्यटन से जोड़कर विस्तार देने की कवायद शुरू हुई थी।

सरकारी स्तर पर इस योजना को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर विचार किया जा रहा था, ताकि राजधानी में आने वाले पर्यटकों को बेहतर विकल्प मिल सके और स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ प्राप्त हो।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 तक इस योजना के तहत दिल्ली में 432 घरों में 2,200 से अधिक कमरे पंजीकृत थे।

मालवीय नगर अग्निकांड के बाद सुरक्षा पर उठे सवाल

मालवीय नगर में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहा है। यदि B&B या इसी तरह की आवासीय सुविधाओं में फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकास, विद्युत सुरक्षा और भवन मानकों की नियमित जांच नहीं की जाए तो ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

घटना के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग यह जांच कर रहे हैं कि जिस परिसर में आग लगी, वहां सभी आवश्यक अनुमतियां और सुरक्षा प्रबंध मौजूद थे या नहीं।

सरकार कर सकती है नियमों की समीक्षा

21 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे के बाद संभावना जताई जा रही है कि सरकार B&B स्कीम के नियमों और सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा कर सकती है।

विशेष रूप से फायर सेफ्टी ऑडिट, पंजीकरण प्रक्रिया, निरीक्षण प्रणाली और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक सख्त बनाने पर विचार किया जा सकता है।

मालवीय नगर अग्निकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आवासीय परिसरों में संचालित ऐसी सुविधाओं की निगरानी कितनी प्रभावी है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है।