Movie prime

Air India Pilot Dop Test: पायलट के डोप टेस्ट में मिला गांजा, प्लेन उड़ाने से पहले क्या-क्या जांच होती है, जानिए DGCA के सख्त नियम

Air India Flight AI-2379 में क्रूज के दौरान विमान करीब 300 फीट नीचे चला गया था। घटना के बाद मुख्य पायलट का डोप टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव पाए जाने की जानकारी सामने आई। जानिए पायलट के लिए DGCA के डोप टेस्ट, ब्रीथ एनालाइजर, मेडिकल फिटनेस और थकान से जुड़े सख्त नियम।

 
Air India Pilot Dop Test
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

Air India Pilot Dop Test: 4 अगस्त 2026 को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 में उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब क्रूज के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे चला गया। विमान में 137 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे। घटना में 13 यात्री और 4 क्रू मेंबर घायल हुए। अब सामने आई जानकारी के मुताबिक, हादसे के बाद किए गए डोप टेस्ट में विमान के मुख्य पायलट का सैंपल मारिजुआना के लिए पॉजिटिव पाया गया। इस खुलासे ने विमान उड़ाने से पहले पायलटों की मेडिकल और नशामुक्ति जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उड़ान से पहले पायलट की होती है कई स्तर पर जांच

भारत में विमान संचालन की सुरक्षा को लेकर पायलटों और केबिन क्रू के लिए कड़े नियम लागू हैं। शराब और साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन को लेकर जांच उड़ान सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

पायलट की ड्यूटी से पहले मुख्य रूप से ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट और निर्धारित परिस्थितियों में साइकोएक्टिव सब्सटेंस/डोप टेस्ट जैसी जांच प्रक्रियाएं लागू होती हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विमान संचालन के दौरान क्रू पूरी तरह सतर्क और ड्यूटी के लिए फिट हो।

ब्रीथ एनालाइजर में 0.000 जरूरी

ड्यूटी से पहले पायलट और संबंधित क्रू मेंबर का ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट किया जाता है। इसमें सांस के जरिए शरीर में मौजूद अल्कोहल की जांच होती है।

नियमों के तहत ड्यूटी के समय अल्कोहल की मौजूदगी स्वीकार्य नहीं है। यदि निर्धारित टेस्ट में अल्कोहल की पुष्टि होती है तो संबंधित क्रू मेंबर को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया जाता है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

कुछ मामलों में माउथवॉश, कफ सिरप या अन्य अल्कोहल युक्त उत्पादों की वजह से शुरुआती जांच प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा जांच का प्रावधान भी होता है।

डोप टेस्ट में किन पदार्थों की होती है जांच?

पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस जांच का मकसद ऐसे नशीले पदार्थों का पता लगाना है, जो उनकी निर्णय लेने की क्षमता, प्रतिक्रिया और एकाग्रता को प्रभावित कर सकते हैं।

जांच में परिस्थितियों और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार गांजा/कैनाबिस, कोकीन, ओपिओइड तथा एम्फैटामिन जैसे पदार्थों की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है।

डोप टेस्ट पॉजिटिव होने पर क्या कार्रवाई होती है?

नियमों के तहत साइकोएक्टिव पदार्थ के सेवन की पुष्टि होने पर पायलट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। पहली बार उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है। दोबारा उल्लंघन पर निलंबन की अवधि काफी बढ़ जाती है, जबकि बार-बार नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द किए जाने तक की कार्रवाई संभव है।

ऐसे मामलों में केवल टेस्ट की रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि निर्धारित मेडिकल और नियामकीय प्रक्रिया के तहत आगे की जांच भी महत्वपूर्ण होती है।

शराब पीने के कितने घंटे बाद पायलट उड़ान भर सकता है?

पायलटों के लिए शराब के सेवन को लेकर भी सख्त नियम हैं। ड्यूटी से पहले निर्धारित अवधि में शराब का सेवन प्रतिबंधित है। इसके अलावा ड्यूटी के समय ब्रीथ एनालाइजर में अल्कोहल की मौजूदगी पाए जाने पर पायलट को उड़ान संचालन से दूर किया जा सकता है।

यानी केवल यह मान लेना पर्याप्त नहीं है कि शराब पीने के कई घंटे बाद उसका असर खत्म हो गया होगा। ड्यूटी के समय जांच में अल्कोहल की मौजूदगी सबसे अहम मानी जाती है।

माउथवॉश या दवा से टेस्ट पॉजिटिव हो तो?

कई बार कुछ माउथवॉश, कफ सिरप या अन्य उत्पादों में मौजूद अल्कोहल के कारण शुरुआती ब्रीथ एनालाइजर रीडिंग प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा जांच की व्यवस्था होती है। यदि दोबारा जांच में भी अल्कोहल की पुष्टि होती है तो संबंधित क्रू मेंबर को नियमों के अनुसार अनफिट माना जा सकता है और आगे की कार्रवाई की जाती है।

सिर्फ नशा नहीं, पायलट की थकान भी बड़ा सुरक्षा जोखिम

विमान सुरक्षा में केवल शराब और ड्रग्स की जांच ही महत्वपूर्ण नहीं है। पायलट की थकान और नींद की कमी भी गंभीर जोखिम मानी जाती है। लंबे समय तक लगातार ड्यूटी करने या पर्याप्त आराम नहीं मिलने से पायलट की एकाग्रता, प्रतिक्रिया और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से डीजीसीए ने Flight Duty Time Limitations (FDTL) से जुड़े नियम बनाए हैं, जिनका उद्देश्य क्रू को पर्याप्त आराम और नींद उपलब्ध कराना है।

पायलट की मेडिकल फिटनेस भी लगातार जांच के दायरे में

पायलट के लिए सिर्फ उड़ान संचालन की ट्रेनिंग और लाइसेंस होना पर्याप्त नहीं है। निर्धारित मेडिकल मानकों के तहत उनकी फिटनेस की जांच भी जरूरी होती है। इसमें आंखों की रोशनी, सुनने की क्षमता, शारीरिक स्वास्थ्य और अन्य मेडिकल मानकों का आकलन शामिल होता है। पायलट को अपने लाइसेंस और ड्यूटी की आवश्यकताओं के मुताबिक मेडिकल फिटनेस बनाए रखना होता है।

आखिर पायलटों के लिए इतने सख्त नियम क्यों?

विमान हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ता है और एक समय में उसमें सैकड़ों यात्रियों की जान पायलट और पूरे क्रू के निर्णयों पर निर्भर होती है। ऐसे में नशे, थकान या किसी अन्य कारण से पायलट की सतर्कता प्रभावित होना गंभीर सुरक्षा जोखिम बन सकता है।

इसीलिए विमानन क्षेत्र में पायलट की मेडिकल फिटनेस, नशामुक्ति, पर्याप्त आराम और मानसिक सतर्कता को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। एयर इंडिया की AI-2379 उड़ान से जुड़े ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर इन सुरक्षा प्रक्रियाओं की अहमियत को सामने ला दिया है।