हवाई सफर होगा सस्ता! सरकार ने विमान ईंधन में इथेनॉल ब्लेंडिंग को दी अनुमति
Apr 22, 2026, 19:36 IST
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नई दिल्ली : देश में हवाई यात्रा और एविएशन सेक्टर को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में इथेनॉल मिलाने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही अब विमान ईंधन में अन्य सिंथेटिक यानी मानव निर्मित हाइड्रोकार्बन भी मिलाए जा सकेंगे। इस संबंध में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है।
सरकार के इस फैसले को देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब ATF को अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे IS 17081 के अनुसार ब्लेंड किया जा सकेगा।
नियमों में किया गया संशोधन
यह फैसला आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत जारी ‘एविएशन टर्बाइन फ्यूल (मार्केटिंग का विनियमन) आदेश 2001’ में संशोधन के बाद लिया गया है। मंत्रालय ने ATF की मार्केटिंग और प्रवर्तन से जुड़े नियमों को भी अपडेट किया है ताकि उन्हें संशोधित आपराधिक प्रक्रिया प्रावधानों के अनुरूप बनाया जा सके।
हालांकि सरकार ने फिलहाल यह तय नहीं किया है कि ATF में कितनी मात्रा में इथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके लिए कोई समय-सीमा या बाध्यकारी लक्ष्य भी घोषित नहीं किया गया है।
क्यों जरूरी है इथेनॉल ब्लेंडिंग?
अब तक विमान पूरी तरह पारंपरिक ईंधन पर निर्भर थे, लेकिन इथेनॉल और सिंथेटिक फ्यूल के इस्तेमाल से ईंधन लागत कम होने की संभावना है। भारत लंबे समय से आयातित कच्चे तेल पर निर्भर रहा है, जिससे विदेशी मुद्रा पर बड़ा दबाव पड़ता है।
सरकार का मानना है कि वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल से न केवल खर्च कम होगा बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भारत के ‘नेट ज़ीरो’ लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, विमानन क्षेत्र में क्लीन फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ने से प्रदूषण कम होगा और एविएशन सेक्टर अधिक पर्यावरण-अनुकूल बन सकेगा। आने वाले समय में भारत में ग्रीन एविएशन फ्यूल के इस्तेमाल को और बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार के इस फैसले को देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब ATF को अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे IS 17081 के अनुसार ब्लेंड किया जा सकेगा।
नियमों में किया गया संशोधन
यह फैसला आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत जारी ‘एविएशन टर्बाइन फ्यूल (मार्केटिंग का विनियमन) आदेश 2001’ में संशोधन के बाद लिया गया है। मंत्रालय ने ATF की मार्केटिंग और प्रवर्तन से जुड़े नियमों को भी अपडेट किया है ताकि उन्हें संशोधित आपराधिक प्रक्रिया प्रावधानों के अनुरूप बनाया जा सके।
हालांकि सरकार ने फिलहाल यह तय नहीं किया है कि ATF में कितनी मात्रा में इथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके लिए कोई समय-सीमा या बाध्यकारी लक्ष्य भी घोषित नहीं किया गया है।
क्यों जरूरी है इथेनॉल ब्लेंडिंग?
अब तक विमान पूरी तरह पारंपरिक ईंधन पर निर्भर थे, लेकिन इथेनॉल और सिंथेटिक फ्यूल के इस्तेमाल से ईंधन लागत कम होने की संभावना है। भारत लंबे समय से आयातित कच्चे तेल पर निर्भर रहा है, जिससे विदेशी मुद्रा पर बड़ा दबाव पड़ता है।
सरकार का मानना है कि वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल से न केवल खर्च कम होगा बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भारत के ‘नेट ज़ीरो’ लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, विमानन क्षेत्र में क्लीन फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ने से प्रदूषण कम होगा और एविएशन सेक्टर अधिक पर्यावरण-अनुकूल बन सकेगा। आने वाले समय में भारत में ग्रीन एविएशन फ्यूल के इस्तेमाल को और बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
