यूजीसी के नए नियमों पर विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आश्वासन: 'किसी के साथ भेदभाव...
नई दिल्ली: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (यूजीसी) द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026' (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) को लेकर देशभर में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इन नियमों के खिलाफ सामान्य वर्ग के छात्रों और संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान सहित कई राज्यों में धरना-प्रदर्शन और मशाल जुलूस देखे गए हैं। विरोधियों का आरोप है कि नए नियम सामान्य श्रेणी के छात्रों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं और झूठी शिकायतों के माध्यम से उनका शोषण हो सकता है।
इसी बीच केंद्र सरकार ने पहली बार इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत में सभी अभ्यर्थियों और छात्रों को आश्वस्त किया कि नियमों का कोई दुरुपयोग नहीं होगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मैं बहुत विनम्रता से स्पष्ट करना चाहता हूं कि किसी को उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा और भेदभाव नहीं होगा। किसी को डिस्क्रिमिनेशन के नाम पर कानून का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। चाहे यूजीसी हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, सभी की जिम्मेदारी है कि संविधान के दायरे में ही सब कुछ हो। मैं आश्वस्त करता हूं कि कोई अत्याचार या भेदभाव नहीं किया जाएगा। ये व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है।"
ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए हैं, जिसमें एससी, एसटी के साथ-साथ ओबीसी को भी शामिल किया गया है। संस्थानों में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेल और इक्विटी कमिटी बनाना अनिवार्य किया गया है। हालांकि, विरोधी इसे सामान्य वर्ग के खिलाफ बताते हुए नियम वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भ्रांतियों को दूर करने के लिए जल्द ही विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया जा सकता है। फिलहाल, प्रदर्शन जारी हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां नियमों के खिलाफ याचिका दायर की गई है।
