बागी सुरों के बीच ममता ने बदली संगठन की कमान, सायोनी घोष-माला रॉय को झटका, नए चेहरों को मिली अहम जिम्मेदारी
Jun 14, 2026, 11:48 IST
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के आवास पर शनिवार को हुई वरिष्ठ नेताओं की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। राजनीतिक जानकार इस कदम को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों से निपटने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
बैठक के बाद युवा तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष सायोनी घोष को उनके पद से हटा दिया गया। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता जिला इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके अलावा अनुभवी सांसद सौगत रॉय को लोकसभा में पार्टी का सलाहकार बनाया गया है।
उत्तर कोलकाता में बदलाव के सियासी मायने
उत्तर कोलकाता संगठन की कमान कुणाल घोष को सौंपे जाने को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक इस इकाई का संचालन एक कोर कमेटी के माध्यम से किया जा रहा था, जिसकी अगुवाई वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय कर रहे थे। हाल के घटनाक्रमों के बीच इस बदलाव को पार्टी नेतृत्व का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि संगठन पर उसकी पकड़ बरकरार है।
संसदीय रणनीति मजबूत करने की तैयारी
टीएमसी ने लोकसभा में अपनी रणनीति को और प्रभावी बनाने के लिए वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय को सलाहकार की जिम्मेदारी सौंपी है। माना जा रहा है कि संसद के भीतर और बाहर पार्टी के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने में उनका अनुभव महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बैठक में अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने संगठन की वर्तमान स्थिति, आंतरिक चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
बागी गुट ने किए बड़े दावे
दूसरी ओर, पार्टी के भीतर असंतोष भी खुलकर सामने आ रहा है। काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व वाले एक गुट ने दावा किया है कि उसे पार्टी के 28 में से 19 लोकसभा सांसदों का समर्थन प्राप्त है। बताया जा रहा है कि यह गुट लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर खुद को वास्तविक टीएमसी के रूप में मान्यता देने की मांग कर सकता है।
बागी नेताओं का आरोप है कि पार्टी का वर्तमान नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं और आम जनता से दूर होता जा रहा है। हालांकि टीएमसी नेतृत्व इन दावों को खारिज करते हुए संगठन को एकजुट बनाए रखने की कोशिश में जुटा हुआ है।
विधानसभा में भी बढ़ीं चुनौतियां
संगठनात्मक संकट केवल लोकसभा तक सीमित नहीं है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई विधायकों के अलग रुख अपनाने से राजनीतिक माहौल गर्म है। वहीं, पूर्व मंत्री मानस भुइयां के इस्तीफे सहित लगातार सामने आ रहे असंतोष ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के लिए संगठनात्मक एकता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। ऐसे में ममता बनर्जी द्वारा किए गए ताजा फेरबदल को पार्टी को संभालने की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक के बाद युवा तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष सायोनी घोष को उनके पद से हटा दिया गया। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता जिला इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके अलावा अनुभवी सांसद सौगत रॉय को लोकसभा में पार्टी का सलाहकार बनाया गया है।
उत्तर कोलकाता में बदलाव के सियासी मायने
उत्तर कोलकाता संगठन की कमान कुणाल घोष को सौंपे जाने को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक इस इकाई का संचालन एक कोर कमेटी के माध्यम से किया जा रहा था, जिसकी अगुवाई वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय कर रहे थे। हाल के घटनाक्रमों के बीच इस बदलाव को पार्टी नेतृत्व का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि संगठन पर उसकी पकड़ बरकरार है।
संसदीय रणनीति मजबूत करने की तैयारी
टीएमसी ने लोकसभा में अपनी रणनीति को और प्रभावी बनाने के लिए वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय को सलाहकार की जिम्मेदारी सौंपी है। माना जा रहा है कि संसद के भीतर और बाहर पार्टी के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने में उनका अनुभव महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बैठक में अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने संगठन की वर्तमान स्थिति, आंतरिक चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
बागी गुट ने किए बड़े दावे
दूसरी ओर, पार्टी के भीतर असंतोष भी खुलकर सामने आ रहा है। काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व वाले एक गुट ने दावा किया है कि उसे पार्टी के 28 में से 19 लोकसभा सांसदों का समर्थन प्राप्त है। बताया जा रहा है कि यह गुट लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर खुद को वास्तविक टीएमसी के रूप में मान्यता देने की मांग कर सकता है।
बागी नेताओं का आरोप है कि पार्टी का वर्तमान नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं और आम जनता से दूर होता जा रहा है। हालांकि टीएमसी नेतृत्व इन दावों को खारिज करते हुए संगठन को एकजुट बनाए रखने की कोशिश में जुटा हुआ है।
विधानसभा में भी बढ़ीं चुनौतियां
संगठनात्मक संकट केवल लोकसभा तक सीमित नहीं है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई विधायकों के अलग रुख अपनाने से राजनीतिक माहौल गर्म है। वहीं, पूर्व मंत्री मानस भुइयां के इस्तीफे सहित लगातार सामने आ रहे असंतोष ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के लिए संगठनात्मक एकता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। ऐसे में ममता बनर्जी द्वारा किए गए ताजा फेरबदल को पार्टी को संभालने की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
