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ऊर्जा संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, गर्मी की छुट्टियों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई

 
ऊर्जा संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, गर्मी की छुट्टियों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई
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New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती ऊर्जा चिंताओं के बीच बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान बैठने वाली अवकाशकालीन बेंचों का पूरा काम अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी सर्क्युलर में कहा गया है कि नए मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित दिन— सोमवार और शुक्रवार या इसके लिए घोषित अन्य किसी भी दिन— पूरी तरह वर्चुअल मोड में संचालित किए जाएंगे।

यह फैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता में शुक्रवार, 15 मई 2026 को हुई फुल कोर्ट बैठक में लिया गया।

ईंधन बचत और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने अपने सर्क्युलर में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 12 मई 2026 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम के मद्देनजर यह कदम तत्काल प्रभाव से लागू किए जा रहे हैं।

अदालत ने बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए न्यायिक कार्यप्रणाली में बदलाव का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी न्यायाधीशों से कार पूलिंग को बढ़ावा देने की अपील की गई है, ताकि ईंधन की बचत सुनिश्चित की जा सके।

कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। आदेश के मुताबिक, रजिस्ट्री के अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारी सप्ताह में दो दिन घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम कर सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम न केवल ऊर्जा संरक्षण बल्कि डिजिटल न्यायिक व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अदालतों में आने-जाने का खर्च और समय दोनों बचेंगे, साथ ही प्रशासनिक कामकाज अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।