UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य बना असम, विधानसभा में पास हुआ बिल
Dispur : असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता यानी UCC विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही असम, Uttarakhand और Gujarat के बाद UCC लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है।
विधानसभा में बिल पारित होने के बाद मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया और एनडीए विधायकों को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।
‘हर धर्म के लोगों को मिलेगा बराबरी का अधिकार’
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि UCC बिल पास होने के बाद असम में रहने वाले सभी धर्मों के लोगों को नागरिक मामलों में कानून के सामने समान अधिकार मिलेगा।
उन्होंने लिखा कि असम ऐसे सुधारों के साथ आगे बढ़ता रहेगा जो समाज को मजबूत करें, महिलाओं को न्याय दें, परिवारों की सुरक्षा करें और समुदायों के बीच एकता बढ़ाएं। यह केवल कानूनी सुधार नहीं बल्कि अधिक न्यायपूर्ण और एकजुट भविष्य की दिशा में बड़ा कदम है।
सीएम ने कहा कि यह फैसला संविधान निर्माताओं की उस सोच को भी पूरा करता है जिसमें पूरे देश के लिए समान नागरिक कानून की परिकल्पना की गई थी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विधानसभा में सोमवार को संसदीय कार्य मंत्री Atul Bora ने UCC विधेयक पेश किया था। सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे सभी वर्गों के लिए लाभकारी बताया, जबकि विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए।
कांग्रेस विधायक दल के नेता Wajed Ali Choudhury ने कहा कि बिल में जिन मुद्दों का उल्लेख किया गया है, वे पहले से अलग-अलग कानूनों के तहत लागू हैं।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह, बहुविवाह, विवाह और तलाक का पंजीकरण, गुजारा भत्ता जैसे मामलों के लिए पहले से कानून मौजूद हैं। ऐसे में UCC लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
क्या है UCC?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का मतलब देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानून लागू करना है, चाहे व्यक्ति किसी भी धर्म या समुदाय से जुड़ा हो।
UCC को लेकर देशभर में लंबे समय से बहस चल रही है। समर्थकों का कहना है कि इससे समानता और महिला अधिकारों को मजबूती मिलेगी, जबकि विरोधी दल इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।
