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मध्य प्रदेश में UCC को विधानसभा की मंजूरी, जानिए क्या है समान नागरिक संहिता और क्या होंगे बड़े बदलाव
 

 
 मध्य प्रदेश में UCC को विधानसभा की मंजूरी, जानिए क्या है समान नागरिक संहिता और क्या होंगे बड़े बदलाव
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भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक को मंजूरी दे दी है। सोमवार को मानसून सत्र में पेश किए गए इस विधेयक को मंगलवार को चर्चा के बाद सदन से पारित कर दिया गया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश भी गोवा, उत्तराखंड और गुजरात के बाद उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों को धर्म, जाति और समुदाय से ऊपर उठकर समान अधिकार देने के उद्देश्य से लाया गया है।

क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?

समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड ऐसा कानून है, जिसके तहत सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, भरण-पोषण, गोद लेना, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे पारिवारिक मामलों में एक समान नियम लागू होते हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।

संविधान में क्या है प्रावधान?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों के तहत समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रावधान किया गया है। इसमें कहा गया है कि राज्य नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करेगा। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी इसे आवश्यक बताया था, हालांकि उन्होंने इसे सामाजिक सहमति के आधार पर लागू करने की बात कही थी।

UCC का इतिहास

समान नागरिक संहिता की अवधारणा ब्रिटिश शासनकाल से जुड़ी मानी जाती है। वर्ष 1835 में ब्रिटिश सरकार की रिपोर्ट में भारतीय कानूनों में एकरूपता लाने की सिफारिश की गई थी। बाद में 1941 में बी.एन. राव समिति का गठन कर हिंदू कानूनों के संहिताकरण और महिलाओं को समान अधिकार देने की सिफारिश की गई। स्वतंत्र भारत में यह विषय लगातार राजनीतिक और कानूनी बहस का हिस्सा बना रहा।

मध्य प्रदेश में कैसे हुई तैयारी?

मध्य प्रदेश सरकार ने 27 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन किया और उत्तराखंड तथा गुजरात जैसे राज्यों के मॉडल का भी परीक्षण किया। साथ ही सामाजिक और धार्मिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों तथा आम नागरिकों से सुझाव लेकर ड्राफ्ट तैयार किया गया।

जनता से लिए गए लाखों सुझाव

सरकार ने 22 मई 2026 को एक वेब पोर्टल शुरू किया, जिसके माध्यम से व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की गई।

  • लगभग 3.49 करोड़ SMS भेजे गए।
  • पोर्टल पर 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए।
  • राज्यभर में 50 से अधिक जनपरामर्श बैठकें आयोजित की गईं।
  • इन बैठकों में 10 हजार से अधिक सुझाव मिले।

जनपरामर्श में क्या सामने आया?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार—

  • 93.54% लोगों ने UCC लागू करने का समर्थन किया।
  • 92.20% लोगों ने महिला और पुरुष के लिए समान कानून की वकालत की।
  • 91.32% लोगों ने भेदभावपूर्ण तलाक कानून समाप्त करने का समर्थन किया।
  • 92.66% लोगों ने महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति में समान अधिकार देने की बात कही।
  • 90.96% लोगों का मानना था कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानून कानूनी जटिलताएं बढ़ाते हैं।
  • 86.78% लोगों ने कहा कि मौलिक अधिकारों का सम्मान करते हुए UCC लागू किया जा सकता है।

सरकार का दावा

मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता से सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा मजबूत होगी तथा पारिवारिक मामलों में कानूनी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी।

क्या बदलेगा?

UCC लागू होने के बाद विवाह, तलाक, भरण-पोषण, दत्तक ग्रहण, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े नियम सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होंगे। सरकार का दावा है कि इससे अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण होने वाले कानूनी विवाद और असमानताएं कम होंगी।