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मोबाइल से बीच सड़क बंद हो रहे E-Rickshaw? BAT-BMS ऐप ने बढ़ाई टेंशन, जानिए पूरा सच

BAT-BMS ऐप को लेकर वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मोबाइल से E-Rickshaw बीच सड़क बंद किए जा सकते हैं। क्या यह सच है या महज अफवाह? जानिए BAT-BMS ऐप कैसे काम करता है, इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा कितनी मजबूत है और विशेषज्ञ क्या कहते हैं।
 
BAT-BMS ऐप
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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि BAT-BMS नाम के एंड्रॉयड ऐप की मदद से चलते हुए E-Rickshaw को बीच सड़क अचानक बंद किया जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद इलेक्ट्रिक रिक्शा, इलेक्ट्रिक स्कूटर और इलेक्ट्रिक कार इस्तेमाल करने वाले लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई यूजर्स ने सरकार से इस मामले की जांच की मांग भी की है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में कोई मोबाइल ऐप किसी इलेक्ट्रिक वाहन को चलते-चलते रोक सकता है?

क्या है BAT-BMS ऐप?

BAT-BMS एक Battery Management System (BMS) ऐप है, जिसे चीन की कंपनी Shenzhen Grenergy Technology ने विकसित किया है। यह कंपनी वर्ष 2010 से लिथियम बैटरियां और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम तैयार कर रही है तथा भारत समेत कई देशों में इनकी आपूर्ति करती है।

यह ऐप ब्लूटूथ के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर उसकी स्थिति की निगरानी करता है। इसके माध्यम से बैटरी का तापमान, वोल्टेज, करंट, चार्जिंग स्टेटस और अन्य तकनीकी जानकारी देखी जा सकती है। कई आधुनिक लिथियम बैटरियों में पहले से ब्लूटूथ मॉड्यूल लगा होता है, जिससे इस तरह के ऐप काम करते हैं।

क्या ऐप से E-Rickshaw को तुरंत बंद किया जा सकता है?

वायरल वीडियो में जो दावा किया जा रहा है, उसकी पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

ऐप के उपलब्ध फीचर्स देखने पर इसमें बैटरी मॉनिटरिंग और चार्जिंग कंट्रोल जैसे विकल्प तो मौजूद हैं, लेकिन E-Rickshaw को सीधे बंद करने का कोई स्पष्ट फीचर दिखाई नहीं देता।

हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी तरह बैटरी से मोटर तक जाने वाली बिजली की सप्लाई रोक दी जाए, तो वाहन रुक सकता है। लेकिन इसके लिए केवल ऐप होना पर्याप्त नहीं है। वाहन के कंट्रोलर, बैटरी और संचार प्रणाली तक विशेष तकनीकी पहुंच भी आवश्यक होगी।

आखिर कैसे रुक सकता है इलेक्ट्रिक वाहन?

E-Rickshaw या किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन में बैटरी की बिजली सीधे मोटर तक नहीं जाती। इसके बीच एक कंट्रोलर होता है, जो पूरी पावर सप्लाई को नियंत्रित करता है।

यदि किसी हैकर को बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम या कंट्रोलर पर अनधिकृत नियंत्रण मिल जाए, तभी बिजली की सप्लाई बाधित की जा सकती है। सामान्य परिस्थितियों में केवल ऐप डाउनलोड कर लेने से ऐसा संभव नहीं माना जाता।

क्या ऐप में सुरक्षा संबंधी कमजोरी हो सकती है?

BAT-BMS ऐप को लेकर एक और तथ्य सामने आया है कि इसका अंतिम अपडेट 13 नवंबर 2025 को जारी किया गया था। इसके बाद ऐप में कोई नया अपडेट नहीं आया।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक अपडेट नहीं मिलने वाले ऐप्स में सुरक्षा संबंधी कमजोरियां (Security Vulnerabilities) रह सकती हैं। यदि किसी साइबर अपराधी ने ऐप या उसके कम्युनिकेशन सिस्टम में छेड़छाड़ की हो, तो दुरुपयोग की आशंका से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया जा सकता। हालांकि फिलहाल ऐसे किसी साइबर हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सरकार और एजेंसियों की नजर

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद कई लोगों ने सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को टैग करते हुए इस मामले की जांच की मांग की है। फिलहाल किसी सरकारी एजेंसी ने यह नहीं कहा है कि BAT-BMS ऐप के जरिए बड़े पैमाने पर E-Rickshaw हैक किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल वीडियो को अंतिम सत्य मानने के बजाय तकनीकी जांच का इंतजार करना चाहिए।

E-Rickshaw और EV यूजर्स क्या सावधानी बरतें?

इलेक्ट्रिक वाहन उपयोग करने वालों को केवल आधिकारिक मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी अनजान APK फाइल या संशोधित (Modified) ऐप को इंस्टॉल करने से बचना चाहिए। बैटरी और वाहन के सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट रखना भी जरूरी है। यदि वाहन में असामान्य व्यवहार दिखाई दे, तो तुरंत अधिकृत सर्विस सेंटर से जांच करानी चाहिए।

क्या अभी घबराने की जरूरत है?

फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि BAT-BMS ऐप की मदद से कोई भी व्यक्ति आसानी से चलते हुए E-Rickshaw को बंद कर सकता है। वायरल वीडियो ने जरूर इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे इन दावों की पुष्टि हो सके।