आजम खान को बड़ा झटका! 7 साल पुराने बयान पर कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा
रामपुर की MP-MLA कोर्ट ने सपा नेता आजम खान को 2019 के विवादित बयान मामले में 2 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अधिकारियों पर दिए गए बयान को लेकर दर्ज आचार संहिता उल्लंघन केस में यह फैसला आया है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। रामपुर की MP-MLA कोर्ट ने 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए विवादित बयान मामले में उन्हें दो साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला सात साल पुराने उस बयान से जुड़ा है, जिसमें आजम खान ने तत्कालीन जिला प्रशासन और अधिकारियों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उस दौरान उनके भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के तहत मामला दर्ज किया गया था।
चुनावी सभा में दिया था विवादित बयान
लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार के दौरान आजम खान ने एक जनसभा में अधिकारियों को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने जनता से कहा था कि “कलेक्टर-पलेक्टर से डरने की जरूरत नहीं है” और अधिकारियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी भी की थी। बयान वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और चुनाव आयोग की गाइडलाइन के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था।
लंबी सुनवाई के बाद अब MP-MLA कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए आजम खान को दोषी करार दिया है। अदालत के आदेश के बाद उनकी कानूनी परेशानियां और बढ़ती नजर आ रही हैं।
पहले से जेल में बंद हैं आजम खान
बताया जा रहा है कि आजम खान फिलहाल रामपुर जेल में बंद हैं। इससे पहले भी उन्हें कई मामलों में अदालत से झटका मिल चुका है। अप्रैल 2026 में रामपुर सेशन कोर्ट ने उनके और उनके बेटे अबदुल्लाह आजम खान की अपील खारिज कर दी थी।
वह मामला दो अलग-अलग पैन कार्ड बनवाने से जुड़ा था। नवंबर 2025 में MP-MLA कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उस मामले में भी जुर्माना लगाया था।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
आजम खान के खिलाफ आए नए फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार बढ़ते कानूनी मामलों का असर समाजवादी पार्टी की रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल इस फैसले के बाद आजम खान की कानूनी टीम आगे की रणनीति तैयार करने में जुटी हुई है।
