आधी रात का बड़ा फैसला: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लागू, जानें क्या है महिला आरक्षण कानून?
नई दिल्ली: देशभर की महिलाओं के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन रहा। केंद्र सरकार ने 17 अप्रैल 2026 से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण कानून को लागू कर दिया है। आधी रात को जारी नोटिफिकेशन के साथ संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि, सरकार के इस बड़े फैसले के बावजूद महिलाओं को तुरंत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। कानून मंत्रालय के मुताबिक, आरक्षण का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब नई जनगणना के बाद परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
परिसीमन के बाद ही लागू होगा आरक्षण
सरकारी सूत्रों के अनुसार, तकनीकी रूप से कानून आज से लागू कर दिया गया है, लेकिन लोकसभा और विधानसभा में सीटों का आरक्षण तब लागू होगा जब नए सिरे से सीटों का निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी होगा।
लोकसभा सीटें बढ़कर 850 होने का प्रावधान
इस कानून के तहत भविष्य में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रावधान है। इनमें से 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए और बाकी राज्यों के लिए होंगी। ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 400 के पार जा सकता है।
क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी?
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इसे देश के इतिहास का “सबसे बेहतरीन फैसला” बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम 25-30 साल पहले उठाया जाना चाहिए था, लेकिन अब इसे लागू कर देश गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
क्या है महिला आरक्षण कानून?
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में भी एक-तिहाई हिस्सा महिलाओं के लिए तय किया जाएगा। यह आरक्षण शुरू में 15 वर्षों के लिए लागू होगा, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
हर परिसीमन के बाद बदलेगी आरक्षित सीटें
आरक्षित सीटों का निर्धारण स्थायी नहीं होगा। हर परिसीमन के बाद सीटों का रोटेशन किया जाएगा, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका मिल सके।
क्यों जरूरी था यह कानून?
वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 15% के आसपास है। इस कानून का उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और नीति निर्माण में उनकी भूमिका को मजबूत करना है।
राजनीतिक नजर से अहम फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आने वाले चुनावों में बड़ा असर डाल सकता है। खासकर 2027 के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यह महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति भी माना जा रहा है।
अभी भी कई सवाल बाकी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना परिसीमन के सीटों का आरक्षण कैसे लागू होगा। इसके लिए सरकार लॉटरी सिस्टम या रोटेशन जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है। वहीं विपक्ष ‘कोटा के भीतर कोटा’ यानी OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग को फिर से उठा सकता है।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण कानून लागू होने से भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है, लेकिन इसका वास्तविक असर आने वाले वर्षों में ही देखने को मिलेगा।
